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सलाह: टीकाकरण के बाद कोरोना से कितने सुरक्षित हैं आप? जानिए कैसे कर सकते हैं इसका पता

Mon, 25 Oct 2021 06:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 25 Oct 2021 06:11 PM IST
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igg antibody test to check antibody level after vaccination
कोरोना से कितने सुरक्षित हैं आप - फोटो : iStock

Medically reviewed by-


प्रोफेसर निर्मल कुमार गांगुली
M.B.B.S., M.D., FRCP (लंदन), फेलो, इंपीरियल कॉलेज (लंदन), FAMS
पूर्व महानिदेशक– भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद


कोरोना संक्रमण के लगभग दो साल तक जारी भयंकर प्रकोप के बाद हालात में फिलहाल पहले से सुधार देखने को मिल रहा है। इस लड़ाई में वैक्सीनेशन को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। देश में अबतक 100 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि कई देशों में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा कोरोना के कुछ नए वैरिएंट्स के मामले भी सामने आए हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत अधिक संक्रामक और खतरनाक माना जा रहा है। इन सबके बीच वैक्सीनेशन करा चुके लोगों के मन में एक सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या वह कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित हैं? इसकी पुष्टि कैसी की जा सकती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारे इम्यून रेस्पॉन्स को लेकर निश्चिंत होने और यह तय करने के लिए कि किसी में एंटीबॉडीज का विकास हुआ है कि नहीं, इसके लिए आईजीजी एंटीबॉडी टेस्ट कराया जा सकता है। इसके माध्यम से शरीर में वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरक्षा के स्तर का पता लगाया जा सकता है। आइए इस परीक्षण के बारे में जानते हैं। 

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एंटीबॉडी टेस्ट - फोटो : Pixabay

एंटीबॉडीज क्या होती हैं, इस बारे में जानिए
आईजीजी एंटीबॉडी टेस्ट के बारे में जानने से पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर एंटीबॉडीज क्या होती हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक किसी बीमारी से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम द्वारा बनाए जाने वाले प्रोटीन को ही एंटीबॉडीज कहते हैं। बैक्टीरिया या वायरस जैसी बाहरी चीज के संपर्क में आने पर शरीर आईजीएम (IgM) एंटीबॉडीज का निर्माण करता है। ये पहले एंटीबॉडी होते हैं जिनका निर्माण शरीर किसी नए संक्रमण से लड़ते हुए करता है। यह अल्प अवधि के लिए होते हैं और संभव है किसी संक्रमण के कुछ हफ्ते बाद इनका पता न चल सके। इसके बाद यह IgG एंटीबॉडी द्वारा फॉलो किया जाता है जो ज्यादा चलने वाली इम्यून सुरक्षा मुहैया करवाता है। 

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एंटीबॉडी परीक्षण - फोटो : Pixabay

आईजीजी एंटीबॉडी टेस्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टीकाकरण से बनी प्रतिरक्षा के बारे में जानने के लिए एंटीबॉडी टेस्ट कराया जा सकता है। आईजीजी एंटीबॉडी का सकारात्मक आना इस बात का संकेत होता है कि व्यक्ति या तो पहले कोरोना संक्रमित था या उसे कोविड-19 का टीका लग चुका है। एंटीबॉडीज की ज्यादा संख्या से यह संकेत मिलता है कि न्यूट्रलाइज करने वाले एंटीबॉडीज की संख्या भी ज्यादा है। न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज, भिन्न वर्ग के एंटीबॉडी हैं जो वायरस और होस्ट के बीच इंटरैक्शन को रोकता था। वैसे एंटीबॉडी के विकास का यह मतलब यह नहीं है कि आपको भविष्य में कोविड-19 नहीं होगी।

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शरीर में बनी प्रतिरक्षा का स्तर - फोटो : iStock

यह बात जानना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि आप टीकाकरण के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज के बारे में जानने के लिए एंटीबॉडीज टेस्ट कराने की सोच रहे हैं, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। कुछ एंटीबॉडी टेस्ट संक्रमण से शरीर में बनी एंटीबॉडी का स्तर बताती हैं न कि कोविड-19 टीकाकरण वाले एंटीबॉडी का, इसलिए इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। 

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एंटीबॉडी टेस्ट से जानिए सुरक्षा का स्तर - फोटो : Twitter

टेस्ट कितने समय के बाद कराना चाहिए?
एंटीबॉडी टेस्ट का उपयोग आमतौर कोविड-19 के मौजूदा संक्रमण का पता लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। संभव है कि एंटीबॉडी टेस्ट से यह पता नहीं चले कि आपको इस समय संक्रमण है कि नहीं, क्योंकि संक्रमण के बाद आपके शरीर को एंटीबॉडी बनाने में कई दिन /e हफ्तों लग सकते हैं। टीकाकरण के बाद सही परिणाम जानने के लिए टीके की दूसरी खुराक के कम से कम 14 दिन बाद ही परीक्षण किया जाना चाहिए। इसके लिए अधिकृत पैथलॉजी प्रयोगशालाएं हैं। 


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स्रोत और संदर्भ 
1 https://covid19.who.int/
2 https://www.who.int/news-room/q-a-detail/coronavirus-disease-(covid-19)-vaccines
3 https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/jmv.27098
4 https://www.cdc.gov/coronavirus/2019-ncov/testing/serology-overview.html
5.https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7245198/
6. https://www.jacionline.org/action/showPdf?pii=S0091-6749%2820%2931623-7

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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