आधुनिक समय में जीवनशैली में गड़बड़ी और गलत आदतों के कारण हम तमाम तरह की समस्याओं के तेजी से शिकार होते जा रहे हैं। कई सारी बीमारियां तो ऐसी हैं जो पहले बुजुर्गों और कमजोर व्यक्तियों को होती थीं, लेकिन अब के समय में कम उम्र वाले लोगों को भी अपना शिकार बनाती जा रही हैं। हाइपोथायरायडिज्म की समस्या ऐसी ही है, इसे अंडरएक्टिव थायराइड के नाम से भी जाना जाता है। बच्चे हों या युवा, किसी को भी हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हो सकती है।
अलर्ट: किसी भी उम्र में हो सकती है हाइपोथायरायडिज्म की समस्या, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके
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हाइपोथायरायडिज्म के क्या लक्षण हो सकते हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण, हार्मोन की कमी और स्थिति की गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। सामान्यतौर पर समस्याएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं, कई लोगों में इसके विकसित होने में कुछ साल का भी समय लग सकता है। हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में सबसे पहले लोगों को थकान और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। मेटाबॉलिज्म के कार्यों के धीमे होते जाने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
- ठंड के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि
- कब्ज़
- चेहरे में सूजन
- मांसपेशियों में कमजोरी
- ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाना
- जोड़ों में दर्द, जकड़न या सूजन
- बालों का झड़ना
किन कारणों से होती है हाइपोथायरायडिज्म की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक थायरॉयड ग्रंथि द्वारा पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन न कर पाने की स्थिति में हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हो सकती है। इस समस्या के कई कारक हो सकते हैं, यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न भी हो सकते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक हाइपोथायरायडिज्म का सबसे आम कारण एक ऑटोइम्यून विकार है जिसे 'हाशिमोटो थायरॉयडिटिस' के रूप में जाना जाता है। ऑटोइम्यून विकार की स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही ऊतकों पर हमला कर देती है। कई शोधकर्ताओं का कहना है कि जीन और पर्यावरणीय कारण इस समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को थायराइड सर्जरी के बाद या फिर कई तरह की दवाइयों के इस्तेमाल के कारण भी हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हो सकती है।
हाइपोथायरायडिज्म का इलाज
हाइपोथायरायडिज्म, आजीवन रहने वाली समस्याओं में से एक है। कई लोगों में दवा के साथ लक्षणों को कम किया जा सकता है। डॉक्टर आपको सिंथेटिक (मानव निर्मित) थायराइड हार्मोन T4 दे सकते हैं, इसके गोलियों का सेवन रोजना करना होता है। ऐसे रोगियों को नियमित रक्त परीक्षण के माध्यम से थायराइड हार्मोन के स्तर की जांच कराने की सलाह दी जाती है। इसी के आधार पर डॉक्टर दवा की खुराक को निर्धारित करते हैं। यदि हाइपोथायरायडिज्म के कारण शरीर का वजन बहुत ज्यादा बढ़ या घट गया हो तो डॉक्टर टीएसएच स्तर की जांच कराने को कह सकते हैं, जिससे अन्य दवाइयां दी जा सकें।
हाइपोथायरायडिज्म से कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों के मुताबिक हाइपोथायरायडिज्म को रोकने का कोई तरीका नहीं है। जिन लोगों को थायराइड की समस्याओं का अधिक खतरा हो सकता है उन्हें इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। जिन लोगों को पहले से ही ऑटोइम्यून बीमारी रह चुकी हो, सिर या गर्दन पर रेडिएशन ट्रीटमेंट कराया हो, या परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही हो, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि आहार में सुधार करके इससे बचने का कोई प्रमाण नहीं है, इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेना उचित माना जाता है।
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स्रोत और संदर्भ:
What is hypothyroidism
अस्वीकरण नोट: यह लेख तमाम अंतरराष्ट्रीय मेडिकल वेबसाइटों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।