Medically Reviewed by Dr. Sanjeev Suri
हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) एक खतरनाक बीमारी है। दरअसल, यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव काफी बढ़ जाता है और इसके कारण रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाए रखने के लिए हृदय को सामान्य से अधिक काम करने की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ने की बड़ी वजह हाइपरटेंशन ही होती है। इसके अलावा इससे मस्तिष्क, किडनी और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह दुनियाभर में समय से पहले मौत का एक प्रमुख कारण है। इस समय पूरी दुनिया में 100 करोड़ से भी अधिक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। हालांकि इससे पीड़ित बहुत से लोग इसके लक्षणों पर ध्यान नहीं देते और इस वजह से यह समस्या गंभीर हो जाती है। यही वजह है कि हाइपरटेंशन को 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सावधान: खतरनाक है हाइपरटेंशन की बीमारी, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
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हाइपरटेंशन के लक्षण
- सिर दर्द, सिर चकराना
- थकान और सुस्ती लगना
- दिल की धड़कन बढ़ जाना
- सीने में दर्द
- सांसें तेज चलना या सांस लेने में तकलीफ होना
- आंखों से धुंधला दिखना
हाइपरटेंशन के कारण क्या हैं?
- विशेषज्ञ कहते हैं कि हाइपरटेंशन का मुख्य कारण तनाव और अनियंत्रित खानपान होता है। इसके अलावा मोटापा, नींद की कमी, तैलीय पदार्थों का अधिक सेवन और नमक का अधिक सेवन भी इसके कुछ अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि अपनी डाइट पर ध्यान दें।
हाइपरटेंशन से बचाव के उपाय क्या हैं?
- हाइपरटेंशन से बचाव के लिए फल, सब्जियां और अंकुरित अनाज खाने की आदत बनाएं। इसके अलावा नियमित रूप से व्यायाम करें। इससे वजन के साथ-साथ ब्लडप्रेशर भी नियंत्रित रहता है और सबसे जरूरी कि तनाव और चिंता से तो बिल्कुल ही दूर रहें।
शराब और धूम्रपान छोड़ें
- शराब और धूम्रपान, दोनों ही सेहत के लिए अच्छे नहीं माने जाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अधिक मात्रा में शराब का सेवन हाई बीपी के खतरे को बढ़ाता है। यही हाल धूम्रपान का भी है। इससे भी ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इसलिए आज ही इन दोनों चीजों का त्याग करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, बीमारियों से बचें।
नोट: डॉ. संजीव सूरी बेहद योग्य और अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट हैं। इन्होंने दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से 1984 में एमबीबीएस और 1988 में एमएस (जनरल सर्जन) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद इन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी से एमसीएच (न्यूरो सर्जन) पूरा किया। यह भारत के न्यूरोलॉजिकल सोसायटी के सदस्य भी हैं। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में न्यूरोसर्जरी यूनिट में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर और एसजीपीजीआई लखनऊ में न्यूरोसर्जरी यूनिट में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में भी काम किया है। न्यूरोलॉजिस्ट के रूप में इनकी मिर्गी उपचार, स्ट्रोक, सिरदर्द प्रबंधन, डिमेंशिया, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन उपचार, पक्षाघात, स्पॉन्डिलोसिस, सिर का चक्कर, आंदोलन विकार और एनईआरवी में विशेषता है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।