दुनियाभर में कई प्रकार के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पुरुषों में लंग्स, मुंह और प्रोस्टेट कैंसर जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।
Cervical cancer: एचपीवी वैक्सीन किस उम्र में सबसे ज्यादा असर करती है? इन बातों को भी जानिए
एचपीवी वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी तब मानी जाती है जब इसे वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाए। इसी कारण कई देशों में इसे कम उम्र के किशोरों और किशोरियों के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
एचपीवी संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन
ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी वायरस को इस संक्रमण का प्रमुख कारण माना जाता है। इससे सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ गले, गुदा और जननांगों से जुड़े कुछ अन्य कैंसर का भी खतरा रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी वैक्सीन इन जोखिमों को कम करने में सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है।
- वैक्सीन तब सबसे ज्यादा असरदार मानी जाती है जब इसे वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाए।
- यही कारण है कि इसे कम उम्र के किशोरियों को लगाने की सलाह दी जाती है।
किस उम्र में लगवाएं वैक्सीन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं वैक्सीन लगवाने के बाद भी महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए।
- सामान्यतः 9-14 वर्ष की आयु में और यौन संपर्क शुरू होने से पहले, एचपीवी वैक्सीन सबसे प्रभावी मानी जाती है।
- इस समय तक अधिकांश बच्चों का वायरस से संपर्क नहीं हुआ होता।
- इसमें वैक्सीन की दो डोज लगाई जाती है। पहली डोज के 6-12 महीने के बीच दूसरा टीका लगाया जाता है।
क्या लड़कों को भी लगवानी चाहिए वैक्सीन?
कई विशेषज्ञ लड़कों के लिए भी एचपीवी टीकाकरण की सिफारिश करते हैं।
पुरुषों में एचपीवी संक्रमण गले का कैंसर, गुदा कैंसर, पेनाइल कैंसर और जननांगों पर वार्ट्स जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। यदि पुरुषों का टीकाकरण नहीं होता, तो संक्रमण का फैलाव भी जारी रहता है। इसलिए समलैंगिकों का वैक्सीनेशन भी जरूरी है। विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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