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Mental Health: हर वक्त चिड़चिड़ापन और तनाव रहता है? आखिर क्या है इसका हड्डियों के लिए जरूरी विटामिन से संबंध

Sat, 22 Aug 2026 08:50 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 22 Aug 2026 08:50 AM IST
सार

विटामिन-डी को आमतौर पर हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन इसका संबंध मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य से भी देखा गया है। इसकी कमी कुछ लोगों में थकान, नींद की परेशानी, चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।

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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

शरीर को स्वस्थ रखने की बात होती है तो अक्सर हमारा ध्यान हड्डियों, मांसपेशियों और इम्युनिटी पर जाता है। लेकिन शरीर में मौजूद कुछ पोषक तत्व ऐसे भी हैं, जिनका असर हमारी शारीरिक सेहत के साथ-साथ दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। विटामिन-डी इन्हीं में से एक है। आमतौर पर इसे हड्डियों को मजबूत रखने वाले विटामिन के तौर पर जाना जाता है, लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ इतनी ही नहीं है।



अगर आपको लगातार थकान महसूस होती है, नींद ठीक नहीं आती, बिना किसी खास वजह के चिड़चिड़ापन रहता है या मूड बार-बार बदलता रहता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव, खराब नींद, जीवनशैली और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पोषक तत्वों की कमी भी एक कारण हो सकती है। विटामिन-डी की कमी को लेकर हुए शोधों में भी मानसिक स्वास्थ्य के साथ इसके संबंध पर ध्यान दिया गया है।

विटामिन-डी शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। मस्तिष्क में भी विटामिन-डी के रिसेप्टर्स पाए जाते हैं, जिससे वैज्ञानिकों ने इसके न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य से संभावित संबंधों का अध्ययन किया है। यह मस्तिष्क के सामान्य कामकाज और कुछ ऐसे रसायनों की प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है, जो मूड और नींद को प्रभावित करते हैं।

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विटामिन-डी सेहत के लिए जरूरी - फोटो : Adobe Stock

 विटामिन-डी की कमी से मूड बार-बार बदल सकता है?

अगर आप महसूस कर रहे हैं कि छोटी-छोटी बातों पर आपका मूड बदल जाता है, कभी बहुत चिड़चिड़ापन रहता है तो कभी बिना वजह उदासी महसूस होती है, तो इसे सिर्फ तनाव समझकर नजरअंदाज न करें।
 

  • विटामिन-डी शरीर और मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली में भूमिका निभाता है।
  • कुछ अध्ययनों में विटामिन-डी की कमी और अवसाद जैसे लक्षणों के बीच संबंध देखा गया है।
  • हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि हर व्यक्ति में विटामिन-डी की कमी ही मूड खराब होने की वजह है।


इसलिए अगर मूड में बदलाव लंबे समय से बना हुआ है, साथ में लगातार थकान, नींद की परेशानी या उदासी जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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स्ट्रेस-डिप्रेशन का खतरा - फोटो : Adobe Stock

डिप्रेशन का भी बढ़ जाता है खतरा

विटामिन-डी और डिप्रेशन के बीच संबंध को लेकर कई शोध हुए हैं। कुछ अध्ययनों में विटामिन-डी का स्तर कम होने और अवसाद के लक्षणों के बीच संबंध पाया गया है। अगर किसी को लगातार उदासी, किसी काम में मन न लगना, नींद या भूख में बदलाव, ऊर्जा की कमी या निराशा जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो उसे केवल विटामिन-डी सप्लीमेंट लेकर ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। विटामिन-डी की कमी आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकती है।

अगर आपकी नींद लंबे समय से खराब है, रात में बार-बार आंख खुलती है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर थकान रहती है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ स्थितियों में विटामिन-डी की कमी को भी जिम्मेदार माना जा सकता है।

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विटामिन-डी के लिए धूप जरूरी - फोटो : Freepik.com

विटामिन-डी की कमी को कैसे पहचानें?

विटामिन-डी की कमी होने पर हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते। कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं होते। वहीं कुछ लोगों में हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लगातार ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं या आपको लगता है कि आपके शरीर में विटामिन-डी की कमी का जोखिम है, तो डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है। 
 

  • विटामिन-डी पाने का एक प्रमुख प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों में भी विटामिन-डी पाया जाता है। डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना और संतुलित जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
  • ध्यान रखें कि बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के विटामिन-डी की हाई डोज वाली सप्लीमेंट लेना सही नहीं है। शरीर में किसी भी विटामिन की जरूरत से ज्यादा मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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