पिछले दो दशकों में लोगों के खान-पान, नींद व जीवनशैली आदि में बहुत परिवर्तन हुआ है, इस बदलाव का खामियाजा हमारा शरीर भुगत रहा है। कोरोना के दौर में हम इम्युनिटी बढ़ाने और फिट रहने का महत्व कुछ हद तक तो समझे हैं लेकिन फिर भी हमारे खान-पान में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आया। उल्टे कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम हुई और खान पान के स्तर से समझौता भी हुआ। इससे वजन बढ़ने के अलावा कई अन्य दिक्कतें भी बढ़ती हुई देखी गई हैं।
हेल्थ टिप्स: किन मरीजों को होती है बाईपास सर्जरी की जरूरत, ऑपरेशन के बाद कैसे रखें अपना ख्याल?
बाईपास क्या है और किन्हें इसकी जरूरत?
साधारण शब्दों में समझें तो बाईपास का मतलब है एक रास्ता बंद हो तो दूसरे रास्ते को खोल देना। जब दिल तक खून और ऑक्सीजन के पहुंचने के रास्ते में ब्लॉकेज हो जाता है यानी कोई बाधा आ जाती है तो सर्जरी के जरिए उस ब्लॉकेज के आजू-बाजू से नया रास्ता दिल तक बना दिया जाता है, जिससे ऑक्सीजन और खून को सुचारू रूप से पहुंचना जारी रह सके। इस सर्जरी का मुख्यतः उपयोग कोरोनरी हार्ट डिसीज के इलाज के लिए किया जाता है।
इसके लिए सर्जन आपके शरीर के किसी और भाग से वेन या आर्टरी निकालकर उसे नया रास्ता बनाने के लिए उपयोग में लाते हैं। जब तक आप अस्पताल में रहते हैं तब तक तो आपकी देखभाल विशेषज्ञों द्वारा की जाती है लेकिन जब आप डिस्चार्ज होकर घर जाते हैं तो जरूरत होती है विशेष सावधानी रखने की। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें।
बाईपास सर्जरी के बाद विशेष सावधानी की जरूरत
पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से भारत में डायबिटीज और मोटापे के साथ ही दिल के रोगियों की संख्या बढ़ी है, ऐसे में बाईपास सर्जरी भी आजकल एक आम सर्जरी की तरह हो गई है। मेडिकल साइंस में तरक्की के चलते इलाज के कई आधुनिक तरीके अब मौजूद हैं। बायपास सर्जरी में आधुनिक तरीकों और तकनीक ने इसकी जटिलताओं को कम कर दिया है। इसके बावजूद केवल सर्जरी का सफल हो जाना ही काफी नहीं है। सर्जरी के बाद आप कितनी सावधानियां रखते हैं इसपर आपके आगे का जीवन निर्भर करता है। बाईपास सर्जरी अब परम्परागत पुरानी सर्जरी की तुलना में बहुत आसान है लेकिन इसके बाद अगर सही तरीके से ध्यान रखा जाए तो ज़िन्दगी को सामान्य बनाने में बहुत मदद मिलती है।
बाईपास सर्जरी के बाद किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक?
- सबसे पहली चीज, मरीज के घर के लोग या खुद मरीज डॉक्टर से हर उस चीज के बारे में पूछे जो उसे असमंजस में डाल रही हो। अपनी दवाइयों के डोज़, सोने- बैठने का तरीका, फिजियोथैरेपी, खान-पान आदि हर चीज पर राय लें। अगर आप इसे याद नहीं रख सकते तो कहीं लिखवा लें।
- सर्जरी के करीब 4-6 हफ़्तों के भीतर छोटा चीरा व घाव पूरी तरह भर जाते हैं और आप बेहतर महसूस करने लगते हैं। इस समय आपको एकदम से उठकर काम पर नहीं लगना है।
- शुरुआत के 2-4 हफ्ते आपकी भूख थोड़ी कम हो सकती है लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है। कुछ हफ्तों बाद भूख एकदम खुल सकती है, तब आपको संयम रखना है। डॉक्टर आपको डाइट चार्ट देंगे साथ ही भोजन को चार छोटे टुकड़ों में बांटकर खाने की सलाह देते हैं, इसे जरूर फॉलो करें।
- अपनी डाइट को बैलेंस रखने के लिए आप हफ्ते भर के लिए एक टाइम टेबल बना लें और हर हफ्ते इसको अपने पास मौजूद सामग्री के हिसाब से बदल लें। बैलेंस डाइट जल्दी स्वस्थ होने में भी मदद करेगी और आपको पर्याप्त पोषण भी देगी।
- भोजन का समय रोज एक समान रखें और कोशिश करें कि रात का भोजन 7 बजे के बाद न हो।भोजन में दलिया, ओट्स, बीन्स, हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें। इनमें मौजूद फाइबर पाचन को आसान बनाते हैं और लिवर में गुड कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को बढ़ाते हैं। इसके अलावा ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर पदार्थों यानी अलसी तथा अन्य सीड्स और नट्स का भी इस्तेमाल कीजिए।
यह टिप्स हो सकते हैं मददगार
- डॉक्टर की सलाह से थोड़ी मात्रा में फैट्स को भी डाइट में शामिल करें। फैट्स आपके शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने में मदद करते हैं। इसके लिए ऑलिव ऑयल, नारियल या मूंगफली के तेल का प्रयोग करें।
- कब्ज का होना सामान्य स्थितियों में भी अच्छा नहीं होता। इस सर्जरी के बाद इस बात को लेकर और भी सतर्क रहना जरूरी है। इससे बचाव के लिए फाइबर युक्त चीजों के अलावा एंटीऑक्सीडेंट्स व भरपूर मात्रा में फलों को डाइट में शामिल करें और पर्याप्त पानी पीते रहें।
- सर्जरी के बाद एकदम से पुराने रूटीन पर लौटने की जल्दबाजी न करें। भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाने से लेकर चलने-फिरने, रोजाना के काम करने आदि हर चीज को धीरे धीरे करें।
- यदि सर्जरी के बाद आपके मन में डर या असहजता बनी रहे तो काउंसिलिंग के लिए आगे कदम जरूर बढ़ाएं। अपने डॉक्टर से या किसी मनोचिकित्सक से सलाह लें। अच्छा संगीत सुनें, मित्रों से बात करें, अच्छी नींद लें और डॉक्टर की सलाह पर योग करें।
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