कोरोना वायरस के चलते भारत में लॉकडाउन लागू किया गया है। दुनिया के तमाम देश भी लॉकडाउन में हैं। कई देशों में इस दौरान शराब की बिक्री बढ़ गई है। दूसरी ओर, भारत में इस दौरान शराब की दुकानें बंद हैं। बीबीसी ने केरल में एक ऐसे शख्स से बात की है जिसने अपने लिए एक मिशन तय किया है। यह शख्स लॉकडाउन को शराब की अपनी लत छोड़ने के एक मौके के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
लॉकडाउन के दौरान कैसे छोड़ें शराब की लत?
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पूरी तरह से रोक
दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका और भारत समेत दुनिया के कई देशों ने सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए अपने यहां शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। इसने रथीश सुकुमारन जैसे लोगों के सामने एक गंभीर चुनौती पैदा कर दी है। सुकुमारन केरल में रहते हैं।
रथीश कहते हैं, "मैं नियमित शराब पीने वालों में हूं। रोज शराब नहीं पी पाने और घर के अंदर कैद हो जाने से मैं परेशान हो गया हूं।" 47 साल के रथीश फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के लिए स्क्रिप्टराइटिंग का काम करते हैं। वह खुद को अल्कोहलिक मानते हैं।
शराब छोड़ने का मौका
भारत सरकार ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू किया है। इससे रथीश को यह पता चला कि वह शराब पर किस हद तक निर्भर हैं। ऐसे में उन्होंने शराब की लत को छोड़ने का फैसला किया। रथीश केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम में रहते हैं। पिछले 25 साल से शराब पी रहे रथीश के लिए इसके बिना रहना एक नया अनुभव था।
वह कहते हैं, 'वीकडेज में मैं शाम के वक्त पीना पसंद करता था। लेकिन, छुट्टियों के दौरान में दोपहर से ही पीना शुरू कर देता था।' चूंकि, उनका कामकाज ट्रैवल से जुड़ा हुआ है, ऐसे में पिछले छह महीने से वह तकरीबन हर दिन शराब पी रहे थे।
वह कहते हैं, "मैं कितनी शराब पीता हूं यह इस बात पर निर्भर करता है कि मैं कहां बैठा हूं। आमतौर पर मैं पांच से छह ड्रिंक्स लेता हूं।" लेकिन उनकी पत्नी शराब नहीं पीती हैं और वह अपने पति को घर पर पार्टी भी नहीं करने देती हैं। ऐसे में ज्यादातर बार रथीश आसपास के पब्स और बार में अपने दोस्तों के साथ शराब पीते हैं।
अपनी इच्छाशक्ति की पड़ताल
भारत में शराब की बिक्री तयशुदा दुकानों के जरिए होती है। कम जगहों पर ही सुपरमार्केट्स में शराब बिकती है। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में लॉकडाउन का ऐलान किया, रथीश के दोस्त शराब की दुकानों की ओर दौड़ पड़े ताकि आने वाले दिनों के लिए स्टॉक किया जा सके।
इसके उलट रथीश ने तय किया कि वह ऐसा नहीं करेंगे। उन्होंने शराब के बिना रहने की अपनी इच्छाशक्ति को परखने का फैसला किया। वह कहते हैं, "सरकार के एलान के बावजूद हमारे इलाके में शराब की कुछ दुकानें खुली हुई थीं, लेकिन मैंने इसका फायदा नहीं उठाया।" सात दिनों के बाद उनकी हिम्मत जवाब देने लगी।
मदद पाने की कोशिश
रथीश कहते हैं, "मैंने 20 से अधिक लोगों को मदद के लिए फोन किया। मैं किसी भी हालत में थोड़ी शराब चाहता था। लेकिन, मुझे सफलता नहीं मिली।" रथीश के साथ वही दिक्कत पेश आ रही थी जिसे नशे की लत छोड़ने की कोशिश करने वाला दुनिया का कोई भी शख्स महसूस करता है।
यूके में सरकार ने शराब की दुकानें बंद नहीं कीं। असलियत में सरकार ने इसे आवश्यक सामानों में शामिल कर दिया जिनकी खरीद-फरोख्त लॉकडाउन में भी जारी रह सकती है। दूसरी ओर, जो लोग शराब की लत छोड़ना या कम करना चाहते हैं उनके लिए लॉकडाउन के चलते काउंसलर्स से आमने-सामने बैठकर चर्चा करना नामुमकिन हो गया है।
नशे की लत से जूझ रहे लोगों को मदद करने वाले एक समूह अल्कोहलिक एनोनीमस (एए) ने इस दौरान ऑनलाइन समूह बनाए हैं। संस्थान का कहना है कि मार्च की शुरुआत से यूके में एए की हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स की संख्या में 22 फीसदी का इजाफा हुआ है। कंपनी की चैट सर्विस करीब एक-तिहाई (33 फीसदी) बढ़ गई है।