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लॉन्ग कोविड: संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में बढ़े डिप्रेशन के मामले, इन खाद्य-पदार्थों से मिल सकता है लाभ

Thu, 05 Aug 2021 07:40 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 05 Aug 2021 07:40 PM IST
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डिप्रेशन, लॉन्ग कोविड का लक्षण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock

कोरोना संक्रमण ने लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया है। हृदय और फेफड़ों के अलावा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी कोरोना संक्रमण का असर देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो लॉन्ग कोविड के रूप में कोरोना से संक्रमित रह चुके लोगों में तनाव और अवसाद जैसे गंभीर मामले देखे जा रहे हैं, जिनका समय पर निदान और उपचार आवश्यक होता है। कोरोना की विशेषकर दूसरी लहर लोगों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रही, समाज में हर तरफ फैली असुरक्षा और संक्रमण के भयावह रूप का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखने को मिला, जोकि बहुत से लोगों में संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी बना हुआ है।


डॉक्टरों बताते हैं,आहार का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव पड़ता है। हम जिस प्रकार का भोजन करते हैं, हमारी मनोदशा उसी के आधार पर निर्धारित होती है। चूंकि कोरोना की विपरीत परिस्थितियों ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को विशेष रूप से प्रभावित किया है, ऐसे में इलाज कर रहे डॉक्टरों को दवाइयों के साथ ऐसे रोगियों को आहार और जीवनशैली में बदलाव के बारे में भी प्रेरित करना चाहिए। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे कुछ आहार के बारे में जानते हैं जिनका सेवन मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है। 

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जामुन खाने के कई लाभ - फोटो : iStock

तनाव और अवसाद को कम करता है जामुन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को तनाव और अवसाद की समस्या हो उन्हें आहार में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए। जामुन को एंटीऑक्सिडेंट का एक समृद्ध स्रोत माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन डिप्रेशन कारकों को कम करने में मददगार है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल एंड एनवायरनमेंटल मेडिसिन में "चिंता और अवसाद के लक्षणों पर एंटीऑक्सीडेंट का प्रभाव'' नाम से प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक एंटी-ऑक्सीडेंट मूड को ठीक करने के साथ तनाव और अवसाद के लक्षणों के नियंत्रित करने में काफी मददगार हो सकते हैं।

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डिप्रेशन में विटामिव डी का सेवन फायदेमंद - फोटो : iStock

विटामिन-डी के सेवन से मिलता है लाभ 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें अवसाद होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों के लिए रोजाना दूध पीना फायदेमंद हो सकता है। पबमेड सेंट्रल में प्रकाशित अध्ययन में दूध को अवसाद रोगियों के लिए काफी फायदेमंद बताया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि दूध एक सुपरफूड और विटामिन डी का अच्छा स्रोत है। अवसाद के शिकार लोगों को इसे आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। इसके अलावा दूध मस्तिष्क के तंत्रिका तंत्र को मजबूती देने में भी सहायक है।

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सी-फूड, डिप्रेशन को कम करने में सहायक - फोटो : Pixabay
समुद्री भोजन को बनाएं आहार का हिस्सा
सी फूड को ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है, यह पोषक तत्व अवसाद के शिकार लोगों के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। इसी से संबंधित नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार ओमेगा-3 पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड अवसाद के उपचार और इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में काफी सहायक माना जाता है। अवसाद के शिकार लोगों को आहार के माध्यम से ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त करने के उपायों पर जोर देना चाहिए।
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अवसाद के शिकार लोग खाएं चिकन - फोटो : Pixabay
सेलेनियम की कमी से बढ़ जाता है अवसाद का खतरा
डिप्रेशन को दूर करने में मांसाहार, विशेषरूप से चिकन का सेवन लाभदायक माना जाता है। पबमेड सेंट्रल में "डाइटरी सेलेनियम एंड मेजर डिप्रेशन" नाम से प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में सेलेनियम की कमी अवसाद के जोखिमों को बढ़ा देती है। चिकन और अन्य प्रकार के लीन मीट के माध्यम से इसकी आसानी से पूर्ति की जा सकती है। जिन लोगों को डिप्रेशन की शिकायत है उन्हें चिकन का सेवन जरूर करना चाहिए।


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नोट: यह लेख अवसाद को कम करने के उपायों पर हुए तमाम अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। अध्ययन संलग्न हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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