Thyroid Disease & Infertility: पिछले एक दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि जिन स्वास्थ्य समस्याओं ने लोगों की सेहत को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, हृदय रोग-डायबिटीज और कैंसर के साथ थायरॉइड भी उनमें से एक है। थायरॉइड को लेकर वैसे तो ज्यादा चर्चा नहीं की जाती है पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए कई प्रकार से गंभीर खतरों को बढ़ाने वाला पाते हैं।
Alert: थायरॉइड से न सिर्फ बढ़ रहा मोटापा, मां बनने की उम्मीद भी हो रही कमजोर, डॉक्टर ने किया सावधान
- अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं की सेहत पर, विशेषकर गर्भधारण और इससे संबंधित स्थितियों पर थायरॉइड विकारों का गंभीर असर हो सकता है।
- थायरॉइड की समस्याएं, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों ही प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था को काफी प्रभावित कर सकती हैं।
महिलाओं की सेहत पर थायरॉइड विकारों का असर
अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं की सेहत पर, विशेषकर गर्भधारण और इससे संबंधित स्थितियों पर थायरॉइड विकारों का गंभीर असर हो सकता है। थायरॉइड की समस्याएं, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों ही प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था को काफी प्रभावित कर सकती हैं। ये स्थितियां मासिक धर्म चक्र को बाधित कर सकती हैं, ओव्यूलेशन में बाधा डाल सकती हैं, और गर्भावस्था के दौरान गर्भपात और अन्य जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
- थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी अंडाशय को अंडा रिलीज करने (ओव्यूलेशन) में बाधा उत्पन्न कर सकती है और गर्भाशय की परत के विकास को भी प्रभावित कर सकती है।
- वहीं थायरॉइड हार्मोन की अधिकता अनियमित मासिक धर्म और अंडों के निषेचन से संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती है, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
क्या कहती हैं डॉक्टर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, युवा अवस्था में थायरॉइड विकारों के कारण से महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी बढ़ सकती है। अस्पतालों की रिपोर्ट के मुताबिक, इन्फर्टिलिटी की समस्या लेकर आ रहीं महिलाओं में 25 फीसदी में थायरॉइड की समस्या मिल रही है।
अमर उजाला से बातचीत में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ रश्मि सिंह बताती हैं, गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड होने की आशंका बढ़ जाती है।थायरॉइड हॉर्मोन में उतार-चढ़ाव की स्थिति आपकी सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है।
गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक की समस्याएं
थायरॉइड समस्याओं की शिकार महिलाओं में गर्भपात होने, कंसीव न होने, बच्चा के प्री-मैच्योर होना है, बच्चे का वजन कम होने जैसी समस्याएं देखी जाती रही हैं। महिलाओं और बच्चे में ये समस्याएं एक तरह की होती हैं। लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जो अलग-अलग होती हैं।
- हाइपोथायरायडिज्म में अगर इलाज नहीं किया गया तो बच्चे के ब्रेन और नर्वस सिस्टम के विकास पर असर पड़ता है। ऐसे बच्चे चलना और बोलना देरी से शुरू करते हैं। इसके अलावा आईक्यू लेवल भी कम होता है। बच्चों में सीखने की प्रक्रिया भी धीमी होती है।
- हाइपरथायरायडिज्म में बच्चे को भी थायरॉइड विकार होने की आशंका बढ़ जाती है।
महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
डॉक्टर कहती हैं, सभी महिलाओं को नियमित बॉडी चेकअप के दौरान डॉक्टर की सलाह के आधार पर थायरॉइड टेस्ट जरूर कराते रहना चाहिए। अगर इसमें किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो इसका समय रहते इलाज कराएं।
- थायरॉइड विकारों की रोकथाम के लिए जीवनशैली में बदलाव, खान-पान पर ध्यान देना और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है।
- स्वस्थ आहार का सेवन जिसमें हरी सब्जियां-फल हों साथ ही भोजन में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन होना जरूरी है।
- इसके इलावा तनाव प्रबंधन, धूम्रपान और पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों से बचना भी आपके स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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