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CoronaVirus: हवा में घुले 'एयरोसोल' से कोरोना संक्रमण फैलने का कितना खतरा, शोध अध्ययन में बताया

Wed, 28 Oct 2020 03:16 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Wed, 28 Oct 2020 03:16 PM IST
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how much possible Coronavirus spread in Air research study says about Covid 19 infection by aerosol
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के विभिन्न देशों में कई तरह के शोध अध्ययन हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण फैलने को लेकर भी सैकड़ों शोध हो चुके हैं। इनमें हवाओं के जरिए कोरोना फैलने की संभावना पर भी कई अध्ययन हुए। इसी कड़ी में एक नए अध्ययन में पता चला है कि हमारे खांसने या छींकने के बाद हवा के संपर्क में आने वाली एयरोसोल माइक्रोड्रॉपलेट्स यानी हवा में घुली अतिसूक्ष्म बूंदें) कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने के लिए खास जिम्मेदार नहीं होतीं। यह अध्ययन चौंकाता जरूर है, लेकिन शोधकर्ताओं ने इसमें तथ्य और प्रमाणों के साथ यह बात कही है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

जर्नल ‘फिजिक्स ऑफ फ्ल्यूड’में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक बंद स्थान में Sars-Cov-2 का एयरोसोल प्रसार खास प्रभावी नहीं होता है। शोधकर्ताओं ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति ऐसे स्थान पर आता है जहां कुछ ही देर पहले कोरोना के हल्के लक्षणों वाला संक्रमित व्यक्ति मौजूद था तो भी उस व्यक्ति के संक्रमण की जद में आने की आशंका कम होती है।"

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Coronavirus - फोटो : iStock

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह आशंका और भी कम होती है, जब वह व्यक्ति केवल बात ही कर रहा हो। बता दें कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकले ड्रॉपलेट्स अगर हमारी नाक या मुंह के रास्ते अंदर प्रवेश कर जाते हैं, तो निश्चित ही हमारे कोरोना संक्रमित होने की संभावना प्रबल होती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

Sars-Cov-2 के प्रसार पर इस अध्ययन ने दिखाया कि एयरोसोल प्रसार संभव तो है, लेकिन यह ज्यादा प्रभावी नहीं है, खासतौर पर बिना लक्षण वाले या कम लक्षण वाले संक्रमण के मामलों में। एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय में अध्ययन के सह-लेखक डैनियल बॉन कहते हैं कि अति सूक्ष्म बूंदें होने के कारण उनमें वायरस की संख्या कम होती है। इसलिए उससे संक्रमण के प्रसार का खतरा कम है।

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Coronavirus prevention - फोटो : iStock

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच तमाम सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है। जरा भी लापरवाही लोगों को भारी पड़ सकती है। यूरोप में कोरोना का संक्रमण एक बार फिर से पीक पर है और इटली, स्पेन जैसे देशों में दोबारा पाबंदिया लगानी पड़ रही है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। शारीरिक दूरी और हाथों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना उतना ही जरूरी है। 

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