दुनियाभर में कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण लोगों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि इसकी वैक्सीन को लेकर काफी तेजी से प्रगति हो रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में आम लोगों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होगी। कोरोना वायरस से पहले कई तरह के वायरस सामने आ चुके हैं, लेकिन यह सार्स कोव 2 वायरस बहुत ज्यादा घातक साबित हुआ है। लाखों लोगों की मौत का कारण बनने वाले इस वायरस ने दुनियाभर में बहुत नुकसान पहुंचाया है। एक शोध अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस वायरस के इतने ज्यादा घातक होने की वजह पता लगाई है।
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CoronaVirus: आखिर क्यों इतना घातक है कोरोना वायरस? शोध में सामने आई ये बड़ी वजह
Sat, 15 Aug 2020 12:39 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 15 Aug 2020 12:39 AM IST
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CoronaVirus Research
- फोटो : iStock/Amar Ujala
Coronavirus
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- कोरोना वायरस के इंसानी शरीर में घातक होने का नया कारण सामने आया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के मुताबिक स्पाइक प्रोटीन के पास का एक विशेष क्षेत्र है, जो वायरस के प्रोटीन को इतना ताकतवर बना देता है, ताकि वह इंसानी कोशिका से मजबूती से बंधा रहे।
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- अब तक वैज्ञानिक यही मानते चले आ रहे थे कि कोरोना वायरस के घातक होने के लिए उनकी बाहरी संरचना के नुकीले भाग रूपी स्पाइक प्रोटीन जिम्मेदार हैं। इसी विषय पर और ज्यादा जानकारी इकट्ठा करने के लिए अमेरिका की नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि स्पाइक प्रोटीन के 10 नैनोमीटर की दूरी पर एक विशेष क्षेत्र होता है, जिसे ‘पॉजिटिविली चार्ज्ड साइट’ नाम दिया गया।
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- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
- शोधकर्ताओं का कहना है कि यह ‘पॉजिटिविली चार्ज्ड साइट’ ही कोरोना वायरस की बाहरी नुकीली संरचना के इंसानी कोशिका के रिसेप्टर यानी ग्राही से जुड़ने की क्षमता बढ़ाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर इस क्षेत्र को ब्लॉक कर दिया जाए तो स्पाइक प्रोटीन की क्षमता घट जाएगी, जिससे वायरस को फैलने से रोका जा सकेगा।
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- शोध अध्ययन में कहा गया है कि अब तक जो भी उपाय किए जा रहे हैं, वे सभी लगभग कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन से जुड़े हैं। जबकि वायरस के घातक होने के पीछे पॉजिटिविली चार्ज्ड साइट जैसे अन्य प्रमुख वजहें भी है। शोधकर्ताओं ने कहा, इन वजहों पर भी ध्यान देते हुए इलाज किया जाना चाहिए।