Allergy: घर के अंदर ही मौजूद हैं एलर्जी के कारण, इसलिए हो रहा है गले में दर्द
इनडोर प्रदूषण के कारण बढ़ सकती हैं स्वास्थ्य समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, धूल के कण, फफूंद, पालतू जानवरों के रोएं, हवा में शुष्की और परागकण एलर्जी प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर कर सकते हैं। इससे खांसी, छींक, नाक बंद होने, गले में दर्द और घरघराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं इनडोर एलर्जी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से पहले से ही श्वसन संबंधी समस्याओं के शिकार लोगों के दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। इनडोर एलर्जी के कारण नींद की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।
इस तरह की समस्याओं से बचे रहने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को निरंतर बचाव के लिए उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
घर के भीतर के प्रदूषकों से बचाव के लिए जरूरी है कि समय-समय पर सतहों, कालीनों और असपास की साफ-सफाई का ध्यान रखें। इसके साथ-साथ कमरे में हवा के आवागमन को ठीक बनाए रखने के लिए वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। धूल के कणों से छुटकारा पाने के लिए चादरों को समय-समय पर जरूर बदलें।
कमरे में हवा की गुणवत्ता का रखें ध्यान
अध्ययनकर्ता बताते हैं, बाहरी प्रदूषण की ही तरह से इनडोर प्रदूषण भी सेहत के लिए हानिकारक है। इस प्रकार के जोखिमों को कम करने के लिए हवा को स्वच्छ बनाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कमरे के भीतर हवा की गुणवत्ता अच्छी बनी रहे इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। घरों के भीतर धूम्रपान करने से भी स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का खतरा रहता है।
घर के भीतर की हवा की गुणवत्ता को ठीक बनाए रखने के लिए पौधे लगाएं।
निर्जलीकरण से बचाव करना बहुत जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जिन लोगों को पहले से ही श्वसन संबंधी समस्याएं रही हैं उनमें निर्जलीकरण एक गंभीर समस्या हो सकती है। अगर आप कम पानी पीते हैं तो इससे वायुमार्ग में सूखेपन और जलन की दिक्कत बढ़ सकती है। इसे एलर्जी को बढ़ाने वाला कारक माना जाता है। इस तरह के जोखिमों को कम करने के लिए दिन में कम से कम तीन-चार पानी जरूर पीते रहें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।