कोरोना के साथ-साथ मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले देश के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। देश में मंगलवार तक कुल पांच लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुका है, जिसमें से तीन मामले केरल और दो दिल्ली से है। भारत में संक्रमण से पहले मौत की भी खबर है। वहीं वैश्विक स्तर पर देखें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार अबतक 80 देशों से मंकीपॉक्स के 21,000 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं।
MonkeyPox: कितना घातक है यह संक्रमण? विशेषज्ञों की चेतावनी- लंबे समय तक जारी रह सकता है प्रकोप, रहें सावधान
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लंबे समय तक रह सकता है यह संक्रमण
देश में #Monkeypox की स्थिति को लेकर राज्य सभा में मेरा विस्तृत उत्तर।
मंकीपॉक्स के मामलों को लेकर शोध कर रहे सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी), दिल्ली के वैज्ञानिकों ने इसे 'क्यूरियस केस' के तौर पर वर्णित किया है। आईजीआईबी के डॉ विनोद सकारिया और उनकी टीम ने भी एक अवलोकन के आधार पर बताया कि मंकीपॉक्स संभवतः लंबे समय तक रहा है। हम मानव-मानव संचरण के एक अलग समूह को देख रहे हैं और संभवतः हम इससे वर्षों से अपरिचित रहे हैं। फिलहाल इसके खतरे को देखते हुए सभी लोगों को हर स्तर पर बचाव करते रहने की आवश्यकता है।
कितना खतरनाक हो सकता है यह संक्रमण?
मंकीपॉक्स को लेकर हुए तमाम अध्ययनों में इसे ज्यादा गंभीर नहीं माना जा रहा है, हालांकि पिछले दो महीनों में दुनियाभर में इसके संक्रमण के कारण दर्जनों मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। भारत में भी मंकीपॉक्स से संक्रमित एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जिस 22 वर्षीय युवक की मौत हुई है उसमें मंकीपॉक्स के कोई लक्षण नहीं थे। उसे इंसेफेलाइटिस और थकान के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौत की उच्च-स्तरीय जांच की जा रही है क्योंकि मंकीपॉक्स की मृत्यु दर बहुत कम है।
- Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) 2 Aug 2022
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मंकीपॉक्स का संक्रमण संभवत: पहले से ही था लेकिन इसका पता नहीं चल पाया था। सीएमसी, वेल्लोर में सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग के प्रोफेसर डॉ जैकब जॉन ने एक रिपोर्ट में कहा "मंकीपॉक्स की अब तक गंभीर स्थिति नहीं रही है, इसके अत्यधिक संचरित होने का भी खतरा कम ही है। हालांकि हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि एक ही वायरस के अलग-अलग स्थानों में विभिन्न वैरिएंट्स के कारण इसकी संचरण क्षमता भी अधिक हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए इससे निरंतर विशेष बचाव की आवश्यकता है।
कैसे करें इस खतरे से बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि चूंकि वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैल सकता है, ऐसे में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से बचना चाहिए। इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अच्छा विकल्प हो सकता है। उन जगहों पर जाने से बचें जहां पर इसका प्रकोप अधिक है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों जैसे बिस्तर, कपड़े और तौलिए जैसी संभावित दूषित वस्तुओं को प्रयोग में न लाएं, इससे भी संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोना सुनिश्चित करें, इससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
symptoms of monkeypox
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