क्या आप जानते हैं कि आपके मस्तिष्क और हृदय का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है? या यूं कहें कि एक दूसरे पर निर्भर है। यानी अगर दिल या दिमाग में से कोई भी अस्वस्थ है तो इसका दुष्प्रभाव दूसरे अंग पर देखा जा सकता है। शोधकर्ताओं ने भी अध्ययन में पाया कि जिन लोगों का दिमाग स्वस्थ होता है उनमें हार्ट की समस्याओं के विकसित होने का खतरा कम होता है, वहीं जिन लोगों का हृदय स्वस्थ होता है उनमें डिमेंशिया-अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
सेहत की बात: दिल और दिमाग की सेहत एक दूसरे पर निर्भर, दोनों को स्वस्थ रखना है तो करें ये तीन काम
हार्ट और दिमाग का कनेक्शन
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि आप अपने हृदय को स्वस्थ रखकर, स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी मस्तिष्क संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी कम करते हैं।
असल में हामारा हृदय, वाहिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क सहित शरीर के हर हिस्से में रक्त पंप करता है। रक्त वाहिकाओं के क्षतिग्रस्त होने से हृदय रोग, स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। फिनलैंड के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि वयस्कावस्था में जिन लोगों ने अपने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए प्रयास किए उनमें आगे चलकर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों जैसे अल्जाइमर और डिमेंशिया के विकसित होने का खतरा 40 फीसदी तक कम पाया गया।
आइए जानते हैं कि इन दोनों अंगों को स्वस्थ रखने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं?
आहार का ध्यान रखना सबसे जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भोजन को स्वस्थ रखकर और दिल और दिमाग दोनों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं। आहार में साबुत अनाज, नट्स, मौसमी फल और सब्जियां, दालें, ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजों का नियमित रूप से सेवन करना आपकी रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने और मस्तिष्क में होने वाली दिक्कतों को कम करने में लाभकारी हो सकती है। आहार को स्वस्थ रखकर आप दिल की बीमारियों के खतरे को 40 फीसदी तक कम कर सकते हैं।
नियमित व्यायाम बहुत जरूरी
नियमित व्यायाम संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इससे हृदय और दिमाग में रक्त का प्रवाह बढ़ाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को प्रतिदिन कम से कम 150 मिनट का व्यायाम करने की सलाह देते हैं। व्यायाम करने से सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण शरीर को होने वाली समस्याओं के जोखिमों को भी कम किया जा सकता है।
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों के विकसित होने का खतरा कम हो सकता है।
मस्तिष्क का आराम देना जरूरी
मस्तिष्क का आराम देने के लिए प्रयास करते रहना भी बहुत आवश्यक है, इसके लिए मेडिटेशन और रिलैक्सेशन जैसे अभ्यास किए जा सकते हैं। मेडिटेशन से न सिर्फ मस्तिष्क को आराम मिलता है साथ ही इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है। ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के साथ स्ट्रोक जैसी मस्तिष्क की गंभीर समस्याओं के खतरे को भी कम कर सकता है।
दिमाग और दिल दोनों को सेहतमंद रखने के लिए डीप ब्रीदिंग अथवा मेडिटेशन जैसे अभ्यास लाभकारी हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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