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इस तरह बनाई जाती है कृत्रिम आंख और लगाने पर इन बातों का रखना होता है ध्यान
ऑक्युलर प्रोबोथोसिस या नकली आंखें उन लोगों को लगाई जाती है जिन्होंने अपनी आंखें किसी कारणवश खो दी हों। कभी-कभी एक आंख सिकुड़ कर छोटी हो जाती है या कुछ वजहों से जन्म के बाद विकसित नहीं हो पाती है। कई बार किसी ट्रॉमा, सर्जरी या कैंसर के कारण भी ऐसी स्तिथि उत्पन हो जाती है। इससे न केवल खूबसूरती पर असर पड़ता है पर इसका दर्द उनके व्यक्तित्व में झलकने लगता है। आर्टिफीशियल आई लगवाकर मरीज न केवल बाहरी रूप सुधर लेते हैं बल्कि आत्मविश्वास से भर उठते हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए आर्टिफिशियल आई से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें।
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ऑक्युलरिस्ट आँखों के लिए नाप लेते हैं
- फोटो : Ruptly
इस तरह तैयार होती है आर्टिफिशियल आई
जब आँखों के सॉकेट के अंदर घाव पूरी तरह से भर जाता है , तब नेत्र विशेषज्ञ नकली आंखें बनवाने की सलाह देते हैं। ऑक्युलरिस्ट आँखों के लिए नाप लेते हैं। इस नाप के हिसाब से पहले सफ़ेद शेल फिर काली आईरिस बनाए जाती है। इस कांच की आंख को सजीव दिखाने के लिए खून की नसें बहुत ही बारीकी से बनाई जाती हैं। कोशिश पूरी की जाती है की दूसरी आंख से मिलते हुए रंग रूप की आंख तैयार करी जाए ताकि सामने वाला पहचान न पाए। यदि ये आंख बढ़िया पोलिश करके बनाए गए है तो आँखों की पुतलिया सामान रूप से इस नकली आंख के ऊपर से झपकती हैं।
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इसे लगाकर अपने सारे काम आराम से कर सकते हैं
- फोटो : Pixabay
नहीं होती है कोई तकलीफ
इस नकली आँख को लगाने में कोई भी दर्द या चुभन नहीं होती है। समान्य आँख पर इस नकली आँख का कोई भी दुष्परिणाम नहीं होता है। लोग इसे लगाकर अपने सारे काम आराम से कर सकते हैं। ५ साल तक इसके रख रखाव का कोई भी खर्चा नहीं है। इसको लगवाने की कोई उम्र सीमा नहीं है। मामूली सी जाँच के बाद इसको किसी भी उम्र का व्यक्ति लगवा सकता है। बच्चों में भी इसको लगाया जाता है।
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साफ जगह पर रखकर सूखने दें
- फोटो : amarujala
सूखने के लिए जरूर रखें
नकली आंख को महीने में एक बार निकालकर साबुन- पानी से ठीक से धोकर साफ जगह पर रखकर सूखने दें। डॉक्टर द्वारा प्लांगेर दिया जाता है जिसकी मदद से ही आप आर्टिफिशियल आई निकालें और लगाएं।
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इस जगह से पानी का रिसाव हो सकता है
- फोटो : Pixabay
गंदगी को साफ करें
आर्टिफिशियल आई को ज्यादा या रोज़ निकालने पर इस जगह से पानी का रिसाव हो सकता है, पुतली फैल सकती है। इसलिए ये न करें। सतह पर इकट्ठा हुई गंदगी को जरूर साफ करते रहें। सालाना इसकी पोलिश करवाएं।
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