देश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है, इससे लू (हीट स्ट्रोक) लगने सहित किडनी-ब्लड प्रेशर और हार्ट की समस्याएं बढ़ने का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इस मौसम में अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। लू से बचने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना भी जरूरी है।
Health Alert: एक साथ गर्मी और प्रदूषण हो सकता है जानलेवा, अध्ययन में सामने आई ये डराने वाली जानकारी
गर्मी-वायु प्रदूषण का मेल आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय प्रदूषण का मेल अब केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्मी और वायु प्रदूषण का संबंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, वायु की गुणवत्ता तापमान और मौसम के पैटर्न जैसे कारकों से प्रभावित होती है। गर्मी का मौसम भी वायु प्रदूषण के खतरे को बढ़ा देता है। गर्मी के दिनों में सूर्य की रोशनी का बढ़ा हुआ स्तर ग्राउंड-लेवल ओजोन, स्मॉग और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड को बढ़ाने लगता है। इस तरह से गर्मी के दिनों में वायु प्रदूषण का भी खतरा बढ़ जाता है।
गर्म और धूप वाला मौसम जमीनी स्तर पर ओजोन प्रदूषण को बढ़ाने लगता है। ओजोन एक द्वितीयक प्रदूषक है जो रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा निर्मित होता है, ये सेहत के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकता है।
एक साथ गर्मी और प्रदूषण हो सकता है जानलेवा
अध्ययनों से पता चलता है कि गर्मी और प्रदूषण की एक साथ स्थिति सेहत के लिए गंभीर समस्याएं बढ़ाने वाली हो सकती है। वायुप्रदूषण के अति सूक्ष्म कण पीएम 2.5 और अत्यधिक गर्मी दोनों मिलकर न केवल हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियां उत्पन्न करते हैं बल्कि सांस की बीमारियां, हृदय रोग, मधुमेह की जटिलताएं और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले हो सकते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण और तीव्र गर्मी के संयुक्त प्रभाव ने बीते 30 वर्षों में लगभग 1,42,765 लोगों की जान ले ली।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के नतीजे दर्शाते हैं कि पिछले तीन दशकों में न केवल गर्मी और प्रदूषण की घटनाएं पहले से अधिक बार हुई हैं, साथ ही इनके दौरान पीएम2.5 का स्तर भी काफी बढ़ा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 1990 से 2019 के बीच गर्मी और प्रदूषण भरे दौर में पीएम2.5 के संपर्क में आने से दुनिया भर में 6,94,440 लोगों की असमय मृत्यु हुई है।
भारत में किए गए अध्ययन में यह सामने आया कि जब गर्मी अत्यधिक होती है और उसी समय पीएम2.5 का स्तर भी बढ़ा होता है तो मृत्यु दर में तीव्र वृद्धि होती है। करीब 36 लाख मौतों के डाटा के विश्लेषण में यह पाया गया कि अत्यधिक गर्म दिनों में, यदि पीएम 2.5 का स्तर 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बढ़े तो उस दिन मौतों में 4.6% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह आंकड़ा सामान्य दिनों में देखे गए 0.8% की वृद्धि से कई गुना अधिक है।
------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।