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किडनी हेल्थ: ब्लड टेस्ट में क्रिएटिनिन नॉर्मल है तो क्या किडनी को मान सकते हैं हेल्दी? डॉक्टर से जानिए

Fri, 02 Oct 2026 08:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 02 Oct 2026 08:14 PM IST
सार

क्रिएटिनिन मांसपेशियों से बनने वाला अपशिष्ट पदार्थ है जिसे किडनी खून से बाहर निकालती रहती है। इसका बढ़ना किडनी की फिल्टरिंग कम होने का संकेत हो सकता है, लेकिन मांसपेशियां, भोजन, व्यायाम और कुछ दवाएं भी इसे प्रभावित करते हैं।

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High Creatinine Causes and Kidney Risks Kidney Function test
खून - फोटो : Freepik.com

किडनी शरीर का ऐसा अंग है जो लगातार खून को साफ करने का काम करती है। यही वजह है कि किडनी की सेहत को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है। जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी हो गई है इसने किडनी की समस्याओं को काफी बढ़ा दिया है। कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। बढ़ते जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित रूप से किडनी की जांच कराते रहने की सलाह देते हैं।



जब किडनी की जांच की बात आती है तो सबसे पहले क्रिएटिनिन का नाम सामने आता है। रिपोर्ट में क्रिएटिनिन नॉर्मल आया नहीं कि लोग निश्चिंत हो जाते हैं कि किडनी बिल्कुल ठीक है। लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है। क्रिएटिनिन सामान्य होना अच्छी बात जरूर है, लेकिन इससे अकेले यह साबित नहीं होता कि किडनी पूरी तरह स्वस्थ है या नहीं?
 
कई बार किडनी की शुरुआती बीमारियों में भी क्रिएटिनिन सामान्य रह सकता है। इसलिए किडनी की सही स्थिति जानने के लिए क्रिएटिनिन के साथ कुछ दूसरी जांचें भी जरूरी हो जाती हैं।

High Creatinine Causes and Kidney Risks Kidney Function test
क्रिएटिनिन बढ़ने से किडनी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

क्रिएटिनिन क्या बताता है?

क्रिएटिनिन शरीर में मांसपेशियों के सामान्य काम के दौरान बनने वाला एक बेकार पदार्थ है। किडनी इसे खून से छानकर पेशाब के रास्ते बाहर निकालती रहती है। जब किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है तो खून में क्रिएटिनिन बढ़ सकता है। लेकिन हर बार क्रिएटिनिन बढ़ने का मतलब किडनी की बीमारी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
 

  • क्रिएटिनिन लेवल पर शरीर की मांसपेशियों, खान-पान और कुछ दवाओं का भी असर पड़ सकता है। मांसपेशियां अधिक होने, बहुत ज्यादा पका हुआ मांस खाने, बहुत अधिक तीव्रता वाले व्यायाम करने से भी इसका स्तर बढ़ सकता है। 
High Creatinine Causes and Kidney Risks Kidney Function test
किडनी के लिए खून की जांच - फोटो : Freepik.com

क्रिएटिनिन नॉर्मल है फिर भी हो सकती है बीमारी

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण शर्मा बताते हैं, किडनी की बीमारी के शुरुआती चरणों में क्रिएटिनिन सामान्य रह सकता है। इसलिए डॉक्टर ईजीएफआर टेस्ट कराने की भी सलाह दे सकते हैं। आसान भाषा में समझें तो ये टेस्ट बताता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह साफ कर रही है? किडनी की सही स्थिति को जानने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ मरीज की उम्र और शरीर की बनावट जैसी स्थितियों के साथ  टेस्ट रिपोर्ट का आकलन करते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, क्रिएटिनिन सामान्य आना राहत की बात है, लेकिन इसे देखकर अकेले यह नहीं कहा जा सकता कि किडनी पूरी तरह स्वस्थ है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी रही है डॉक्टर उनमें किडनी की पूरी स्थिति को जानने के लिए जरूरत के अनुसार पर दूसरे टेस्ट रिपोर्ट्स को भी देखते हैं।

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पेशाब की जांच - फोटो : Freepik.com

पेशाब की जांच भी जरूरी

किडनी की हालत जानने के लिए यूरिन टेस्ट भी महत्वपूर्ण है। पेशाब में एल्ब्यूमिन का स्तर अधिक होना भी किडनी को नुकसान पहुंचने का संकेत हो सकता है। एल्बुमिन लिवर द्वारा बनने वाला सबसे प्रमुख प्लाज्मा प्रोटीन है। यह रक्त वाहिकाओं के अंदर पानी और तरल पदार्थ को बनाए रखता है, जिससे वे आसपास के ऊतकों में लीक नहीं होते।

स्वस्थ किडनी आमतौर पर इस प्रोटीन को पेशाब में जाने से रोकती है। इसलिए क्रिएटिनिन, ईजीएफआर और पेशाब में एल्ब्यूमिन की जांच को साथ देखकर किडनी की स्थिति ज्यादा सही तरीके से समझी जा सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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