हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर, मुख्यरूप से लाइफस्टाल में गड़बड़ी के कारण होने वाली समस्या है जो कई गंभीर रोगों का कारण बनती है। आमतौर पर माना जाता है कि ब्लड प्रेशर बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान हृदय की सेहत को होता है। हाइपरटेंशन को हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं के प्रमुख कारण के रूप में भी जाना जाता है। पर ध्यान दें, ब्लड प्रेशर बढ़ना सिर्फ हृदय रोगों की गंभीरता तक ही सीमित नहीं है, इसका शरीर के कई अन्य अंगों पर भी असर हो सकता है।
Hypertension: सिर्फ हृदय ही नहीं, नसों-किडनी के लिए भी हानिकारक है ये बीमारी, भारतीय लोगों में बढ़ रहा है खतरा
हृदय को सबसे ज्यादा नुकसान
उच्च रक्तचाप का सबसे अधिक दुष्प्रभाव हृदय की सेहत पर देखा जाता रहा है। उच्च रक्तचाप के कारण संकुचित और क्षतिग्रस्त धमनियां, हृदय तक रक्त की आपूर्ति ठीक तरीके से नहीं कर पाती हैं। हृदय में रक्त प्रवाह कम होने से सीने में दर्द (एनजाइना), अनियमित हृदय गति या दिल का दौरा पड़ सकता है।
उच्च रक्तचाप हृदय को शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करने के लिए मजबूर करता है। इसके कारण निचला बायां हृदय कक्ष मोटा हो जाता है। इससे हार्ट फेलियर और अचानक मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
नसों-धमनियों को नुकसान
स्वस्थ धमनियां लचीली और मजबूत होती हैं। उनकी आंतरिक परत चिकनी होती है ताकि रक्त का प्रवाह ठीक तरीके से होता रह सके। अंगों और ऊतकों को पोषक तत्व और ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए धमनियों का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। हालांकि उच्च रक्तचाप की समस्या धीरे-धीरे धमनियों के माध्यम से बहने वाले रक्त के दबाव को बढ़ा देती है जिससे इनके क्षतिग्रस्त और संकुचित होने का खतरा रहता है। रक्त का प्रवाह बाधित होना पूरे शरीर के लिए हानिकारक है।
बढ़ जाता है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
ब्रेन स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलते हैं, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं डेड होने लग जाती हैं। उच्च रक्तचाप से क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, फट सकती हैं या उनमें रिसाव हो सकता है। उच्च रक्तचाप के कारण मस्तिष्क तक जाने वाली धमनियों में रक्त के थक्के बन सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है और यह स्ट्रोक का कारण बन सकती है।
किडनी को नुकसान
किडनी, रक्त से अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट को फिल्टर करती हैं। उच्च रक्तचाप के कारण किडनी और वहां तक जाने वाली रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंच सकता है। हाई ब्लड प्रेशर वाले रोगियों में किडनी फेलियर का खतरा बहुत अधिक होता है। क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाएं किडनी को रक्त से अपशिष्ट को प्रभावी ढंग से फिल्टर करने से रोकती हैं, जिससे खतरनाक स्तर के तरल पदार्थ और अपशिष्ट एकत्र हो जाते हैं। ये स्थिति किडनी के लिए बहुत हानिकारक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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