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Covid-19: दुष्प्रभावों को लेकर बड़ी जानकारी, भले ही रहे हों हल्के लक्षण फिर भी इस रोग का खतरा, जरूर कराएं जांच

Mon, 10 Jul 2023 11:31 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 10 Jul 2023 11:31 AM IST
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Heart Problems risk after COVID-19, mild case corona also increase cardiovascular problems
कोविड-19 के कारण हृदय रोगों का खतरा - फोटो : iStock

कोरोना संक्रमण पिछले तीन साल से अधिक समय से वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी चिंता का कारण बना हुआ है। संक्रमण के कारण होने वाली जटिलताओं के साथ लॉन्ग कोविड भी एक बड़ा जोखिम रहा है, जिसका असर कई वर्षों तक भी बना रह सकता है। यहां तक कि एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि कोरोना के शिकार रहे कई लोगों में एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद अब भी स्वाद-गंध न आने की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा पोस्ट कोविड का खतरा फेफड़े, मस्तिष्क सहित कई अन्य अंगों पर भी देखा जा रहा है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब तक मानते रहे हैं कि जिन लोगों को गंभीर संक्रमण रहा था, उनमें लॉन्ग कोविड की समस्या होने का खतरा अधिक हो सकता है, पर नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध ने इस दावे पर भी सवाल उठा दिए हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि भले ही जिन लोगों में हल्के स्तर के लक्षण भी रहे हों, उनमें भी दुष्प्रभावों के रूप में हृदय रोगों के होने का खतरा हो सकता है।

Heart Problems risk after COVID-19, mild case corona also increase cardiovascular problems
कोविड-19 के कारण हृदय रोगों का खतरा - फोटो : iStock

मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन का जोखिम

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत सहित दुनिया के कई देशों में कम उम्र के लोगों में संक्रमण के मामलों का निदान किया जा रहा है। आश्चर्यजनक रूप से इसमें कई लोग ऐसे भी हैं जो कोरोना के हल्के लक्षणों के शिकार रहे थे और इसके बाद पहली बार उनमें हृदय रोगों की पुष्टि की गई है।

कोविड-19 से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक के जोखिमों के बारे में पता लगाने के लिए इटली में एक अध्ययन किया गया, जिसमें पता चला कि संक्रमण से ठीक हुए कई रोगियों में मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन का जोखिम 93 फीसदी अधिक था। 

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हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे से बचाव के उपाय - फोटो : istock

अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि एक साल के दौरान कोविड-19 के शिकार रहे लोगों में, अन्य लोगों की तुलना में हृदय से संबंधित जटिलताओं का खतरा 63 प्रतिशत अधिक था। कोविड-19 के पॉजिटिव टेस्ट वाले प्रति 1,000 लोगों में कम से कम 45 में हृदय संबंधी समस्याएं- जैसे स्ट्रोक या हार्ट फेलियर का जोखिम देखा गया।

कोविड-19 के दीर्घकालिक हृदय संबंधी दुष्परिणामों का मूल्यांकन करने वाले अध्ययनों से पता चला कि यहां तक कि हल्के रोग वाले लोगों में भी संक्रमण के एक साल बाद तक हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। 

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हृदय में बाधित हो सकती है रक्त की आपूर्ति - फोटो : istock

रक्त की आपूर्ति हो सकती है बाधित

ह्यूस्टन में डेबेकी हार्ट एंड वैस्कुलर सेंटर द्वारा किए गए एक अन्य शोध में हृदय पर कोविड के दीर्घकालिक प्रभावों को जानने की कोशिश की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना वायरस वाहिकाओं और हृदय की मांसपेशियों दोनों को क्षति पहुंचाता है। इससे हृदय में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने का जोखिम भी अधिक हो सकता है। कोविड-19 के लगभग छह महीने बाद भी हृदय की छोटी वाहिकाओं में रक्त प्रवाह में गड़बड़ी पाई गई, जो कई प्रकार के रोगों को बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है।

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हृदय का रखें ख्याल - फोटो : iStock

हृदय की जरूर कराएं जांच

शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 के दुष्प्रभावों को समझने के लिए ज्यादातर अध्ययनों में पाया गया है कि यह शरीर के लिए कई प्रकार की जटिलताओं का कारण बन सकती है, जिसमें हृदय रोगों का खतरा सबसे अधिक है। कोविड-19 से एक साल पहले ठीक हो चुके लोगों में सेरेब्रोवास्कुलर जटिलताओं, हृदय गति की असमानता, इंफ्लामेशन या इस्केमिक हार्ट डिजीज का खतरा हो सकता है। ऐसे में भले ही आपमें संक्रमण के दौरान हल्के स्तर के ही लक्षण रहे हों फिर भी एहतियातन हृदय की जांच करा लें और नियमित रूप से हृदय को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहें। 




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स्रोत और संदर्भ
Heart-disease risk soars after COVID — even with a mild case


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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