पिछले तीन साल से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना के संक्रमण ने लोगों की सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि जिन लोगों को कोमोरबिडिटी यानी एक ही समय पर एक से अधिक गंभीर बीमारी रही हो, ऐसे लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। यही कारण है कि डायबिटीज, हृदय, किडनी जैसे रोगों के शिकार लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरतते रहने की सलाह दी जाती रही है। इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोमोरबिडिटी वाले, विशेषकर डायबिटीज के शिकार जिन लोगों को संक्रमण हुआ था, उनमें अब इससे संबंधित गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं देखी जा रही हैं।
Latest Study: डायबिटीज के दौरान हुआ था कोरोना? सावधान- ऐसे लोगों में इस जानलेवा समस्या का देखा गया जोखिम
कोरोना संक्रमित डायबिटिक रोगियों में हार्ट फेलियर का जोखिम
कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता डॉ दिनेंद्र सिंगला ने इस अध्ययन में बताया कि डायबिटिक रोगियों में कोरोना संक्रमण के दौरान ऐसे जेनिटिक मेकअप देखे गए हैं, जो उनमें इंफ्लामेटरी समस्याओं को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके दुष्प्रभाव हृदय और मस्तिष्क पर देखे जा रहे हैं। इस तरह के खतरे को ध्यान में रखते हुए संक्रमित रह चुके मधुमेह रोगियों को एहतियातन हृदय की जांच जरूर करा लेनी चाहिए, जिससे इसके संभावित जोखिमों को कम किया जा सके। डायबिटीज रोगियों में स्वाभाविक रूप से भी कार्डियोवास्कुलर समस्याओं का खतरा अधिक होता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के बारे में डॉ सिंगला बताते हैं, शोध के दौरान हमने पाया कि डायबिटीज रोगियों में कोरोनावयरस, व्यक्ति के आनुवंशिक मेकअप को बदलाव का कारण बन रहा है जो बीमारी की गंभीरता का कारण बनता है। ऐसे रोगियों में हमने तीन गंभीर प्रकार के दीर्घकालिक जोखिमों का पता लगाया है।
पहला- कॉग्नेटिव डिस्फंक्शन, जो अल्जाइमर जैसे रोगों का कारण बनती है, दूसरा- यह प्री-डायबिटीक रोगियों में डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता हुआ देखा गया है और तीसरा यह कार्डियोमायोपैथी या मांसपेशियों की शिथिलता का कारण बन रही है। ये तीनों ही जटिलताएं गंभीर मानी जाती हैं।
इंफ्लामेशन और ब्लड सेलुलर कंपोजीशन की दिक्कत
शोधकर्ता बताते हैं, कोरोना संक्रमित कुछ डायबिटिक रोगियों के रक्त में अलग प्रकार का सेलुलर कंपोजीशन देखा गया है। यह भी जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। डॉ सिंगला कहते हैं, आगे हमारा लक्ष्य यह देखना है कि रक्त संरचना में यह अंतर किस प्रकार के दुष्प्रभावों का कारण बन सकता है। यदि कोई अंतर नोट किया जाता है, तो हमें यह जांचने की आवश्यकता होगी कि वे उन रोगियों में किस प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकते हैं या बढ़ा सकते हैं। इस बारे में विस्तार से समझने के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
इस अध्ययन के बारे में अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉ विक्रमजीत सिंह कहते हैं, कोमोरबिडिटी वालों में संक्रमण के कारण कई प्रकार की दीर्घकालिक जटिलताओं के जोखिमों को लेकर पहले से अलर्ट किया जाता रहा है। चूंकि इस अध्ययन में हृदय और मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं को बढ़ा हुआ देखा जा रहा है, ऐसे में जो लोग संक्रमित रहे हैं उन्हें डॉक्टर से मिलकर एहतियातन जांच जरूर करा लेनी चाहिए। इससे अगर कोई स्थिति विकसित हो भी रही होगी तो उसका समय पर इलाज करके ठीक किया जा सकेगा।
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स्रोत और संदर्भ
Mechanisms of COVID-19 pathogenesis in diabetes
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