अगर आपको लगता है कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण के लिए ही खतरा है, इससे हमें क्या फर्क पड़ेगा? तो यकीन मानिए आप बड़ा खतरा मोल ले रहे हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि यही प्लास्टिक गंभीर रूप से हमारी सेहत के लिए खतरा बढ़ाता जा रहा है।
Heart Disease: हार्ट अटैक के मामलों को लेकर बड़ा खुलासा, क्या प्लास्टिक का उपयोग बढ़ा रहा है खतरा?
जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका था, उनके खून में सूक्ष्म प्लास्टिक कण सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक मिले। हालांकि वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि इससे यह साबित नहीं होता कि प्लास्टिक ही हार्ट अटैक का कारण है।
माइक्रोप्लास्टिक से बढ़ता खतरा
इटली के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक (दिल का दौरा) हो चुका था, उनके खून में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक की मात्रा पाई गई। ये उन लोगों की तुलना में ज्यादा थी, जिन्हें कभी हार्ट अटैक नहीं आया या जिनकी हृदय की धमनियां सामान्य थीं।
- माइक्रोप्लास्टिक ऐसे बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देते। ये प्लास्टिक की बोतलों, पैकेजिंग, सिंथेटिक कपड़ों और रोजमर्रा के कई प्लास्टिक उत्पादों के टूटने से बनते हैं।
- नैनोप्लास्टिक इससे भी छोटे कण होते हैं, जो शरीर के अंदर तक पहुंच सकते हैं।
- पहले के भी कई अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक को इंसानी सेहत, डीएनए को नुकसान पहुंचाने से लेकर कैंसर तक का खतरा बढ़ाने वाला पाया गया था।
अध्ययन में क्या पता चला?
वैसे तो इस अध्ययन का सैंपल साइज छोटा है। 61 मरीजों पर किए गए अध्ययन में इस बात के सबूत मिले हैं कि पर्यावरण प्रदूषण, विशेषतौर पर पर्यावरण में बढ़ता माइक्रोप्लास्टिक हमारी हृदय संबंधी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
- जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका था, उनमें से 84% के खून में माइक्रोप्लास्टिक या नैनोप्लास्टिक मिले।
- क्रॉनिक इस्केमिक हार्ट डिजीज वालों में यह आंकड़ा 40% था। इस रोग के कारण हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता, क्योंकि धमनियों में प्लाक जमा होने से वे संकुचित हो जाती हैं।
- जबकि सामान्य कोरोनरी आर्टरी वाले लोगों में 32% के खून में ये प्लास्टिक कण पाए गए।
धूम्रपान की आदत और बढ़ा देती है खतरा
अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों को हार्ट अटैक हुआ था, उनके खून में कई प्रकार के प्लास्टिक के सूक्ष्म कण थे। इनमें सबसे ज्यादा पॉलीएथिलीन मिला। यही प्लास्टिक आमतौर पर पैकेजिंग, प्लास्टिक बैग, बोतलों और कई घरेलू सामानों में इस्तेमाल होता है।
- शोधकर्ताओं ने मरीजों में धूम्रपान की आदत और पिछले दो वर्षों में वायु प्रदूषण के संपर्क का भी विश्लेषण किया।
- इसमें पता चला कि जो लोग लंबे समय तक ज्यादा प्रदूषित हवा में रहे, उनके खून में माइक्रोप्लास्टिक मिलने का खतरा अधिक था।
- वहीं धूम्रपान करने वालों के खून में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की आशंका छह गुना ज्यादा थी।
इतना ही नहीं, जो लोग धूम्रपान भी करते थे और साथ ही अधिक प्रदूषित वातावरण में रहते थे, उनके सभी मरीजों के खून में प्लास्टिक कण मिले। इसके उलट, जो लोग न तो धूम्रपान करते थे और न ही अधिक प्रदूषण वाले माहौल में रहते थे, उनमें केवल 12.5% लोगों के खून में प्लास्टिक कण पाए गए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर इमानुएले बारबातो कहते हैं रिसर्च ये साबित नहीं करती है कि माइक्रोप्लास्टिक सीधे हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। लेकिन यह जरूर दिखाती है कि पर्यावरण प्रदूषण, खून में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
मरीजों के डेटा बताते हैं कि प्लास्टिक के सूक्ष्म कण खून के जरिए शरीर में घूमते रहते हैं और रक्त वाहिकाओं की दीवारों में जमा हो सकते हैं। ये कण ऐसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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स्रोत:
Developmental outcomes in 4-year-old children born in the first COVID-19 lockdown in England: preliminary findings from the Born In COVID Year – Core Lockdown Effects (BICYCLE) study
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