Morning Walk Pollution Risk: भारत के कई प्रमुख शहरों, खासकर दिल्ली-एनसीआर में, सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक अक्सर 400+ के 'गंभीर' या 'खतरनाक' स्तर को पार कर जाता है। इसके बावजूद भी कई स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अपनी मॉर्निंग वॉक की आदत को जारी रखते हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक 400+ AQI वाली हवा में व्यायाम करना, सेहत बनाने के बजाय, शरीर में जहर घोलने जैसा है। इस हवा में मौजूद अल्ट्रा-फाइन पार्टिकल्स (जो 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे होते हैं) और अन्य विषैली गैसें, गहरी सांस लेने के साथ सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर जाती हैं।
Health Tips: 400+ AQI में कर रहे हैं मॉर्निंग वॉक? दबे पांव घर कर रही हैं शरीर में ये गंभीर बीमारियां
High AQI Health Impact: दिल्ली में वायु प्रदूषण इन दिनों अपने चरम पर है, इस प्रदूषण में भी बहुत से लोग सुबह के समय मॉर्निंग वॉक या वर्कआउट करते हैं। बता दें कि इसका उनके सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है, और कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं।
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फेफड़ों पर इसका असर
400+ एक्यूआई में मॉर्निंग वॉक करने से फेफड़ों पर सबसे पहले और सबसे बुरा असर पड़ता है। PM2.5 कण फेफड़ों के वायुकोषों को ब्लॉक कर सकते हैं और उनमें सूजन पैदा कर सकते हैं। यह क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), ब्रोंकाइटिस, और अस्थमा जैसी मौजूदा श्वसन समस्याओं को तुरंत ट्रिगर कर सकती है। इसके साथ ही देर तक इस जहरीले वातावरण में रहने से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
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हृदय रोग का बढ़ता जोखिम
प्रदूषण के कण जब ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश करते हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर देते हैं जिससे खून के थक्के बनने का जोखिम बढ़ जाता है। इससे आपके हार्ट पर दबाव बढ़ता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हाई एक्यूआई में बाहर निकलना हृदय रोगियों के लिए अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है।
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मस्तिष्क स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
हाल के शोध बताते हैं कि प्रदूषित हवा के अति सूक्ष्म कण रक्त-मस्तिष्क बाधा को पार करके सीधे मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं। यह न्यूरो-इंफ्लेमेशन पैदा करता है, जिससे संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित होती है और लंबी अवधि में डिमेंशिया या पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
लगातार अधिक एक्यूआई वाले प्रदूषण के संपर्क में रहने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। जब फेफड़े प्रदूषकों से लड़ने में व्यस्त रहते हैं, तो शरीर की संक्रमणों से लड़ने की क्षमता घट जाती है। इससे सामान्य फ्लू, वायरल संक्रमण और यहां तक कि गंभीर श्वसन संक्रमणों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है। इसलिए जब तक वायु प्रदूषण अधिक है, तब तक बाहर का वर्कआउट करने से परहेज करें और घर के अंदर योग करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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