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Health Alert: क्या दिमाग और आंखों को सच में कमजोर कर रहा है स्मार्टफोन? जानिए इसके मिथ्स और फैक्ट्स

Fri, 03 Jul 2026 07:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 03 Jul 2026 07:35 PM IST
सार

कोई कहता है फोन की रेडिएशन दिमाग को नुकसान पहुंचाती है, तो कुछ लोगों का दावा है कि फोन चार्जिंग के दौरान इस्तेमाल करना जानलेवा हो सकता है। वहीं, कई लोग यह भी मानते हैं कि ब्लू लाइट आंखों को हमेशा के लिए खराब कर देती है। क्या इन दावों में वास्तव में सच्चाई है?

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Health risks associated with mobile phones myths and facts of smartphone risk
मोबाइल के नुकसान - फोटो : Amarujala.com/AI

स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह की अलार्म से लेकर, ऑनलाइन मीटिंग, पढ़ाई, बैंकिंग, मनोरंजन और खरीदारी, हर काम स्मार्टफोन के जरिए हो रहा है। लेकिन जितनी तेजी से इसका इस्तेमाल बढ़ा है, इससे संबंधित खतरों को लेकर भी लोगों को लगातार अलर्ट किया जाता रहा है। कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल और इससे निकलने वाली ब्लू लाइट के ज्यादा संपर्क में रहने से सेहत को कई तरह का खतरा हो सकता है। ब्लू लाइट आंखों को तो नुकसान पहुंचाती ही है साथ ही इसका असर नींद को भी बाधित करती है। 



मोबाइल फोन से सेहत को होने वाले कई तरह के नुकसान का दावा किया जाता रहा है। कई रिपोर्ट्स दावा करती है कि फोन की रेडिएशन ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ता है तो कुछ का कहना है कि  ब्लू लाइट आंखों को हमेशा के लिए खराब कर देती है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल होने वाली आधी-अधूरी जानकारी के कारण लोग अक्सर इन दावों को बिना जांचे-परखे सच मान लेते हैं। 

आइए वैज्ञानिक फैक्ट्स के साथ जान लेते हैं कि आखिर स्मार्टफोन वास्तव में हमारी सेहत के लिए कितने नुकसानदायक हैं? और इंटरनेट को मोबाइल को लेकर कौन सी भ्रामक जानकारियां फैली हुई हैं?

Health risks associated with mobile phones myths and facts of smartphone risk
बढ़ता स्क्रीन टाइम खतरनाक - फोटो : Freepik.com

स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक तो है ही, पर इससे जुड़े कई दावे सही नहीं है या फिर उनमें सच का केवल एक छोटा-सा हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि असली खतरा फोन से कम और उसके गलत इस्तेमाल से ज्यादा जुड़ा हुआ है। घंटों लगातार स्क्रीन देखना, देर रात तक मोबाइल चलाना, गलत पोस्चर में बैठना, नोटिफिकेशन की लत और स्क्रीन टाइम का बढ़ना ये आदतें निश्चित रूप से स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं, लेकिन इसके पीछे कारण वही नहीं हैं जो अक्सर वायरल मैसेजों में बताए जाते हैं।

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मोबाइल फोन से कैंसर का खतरा? - फोटो : Freepik.com

मिथ: स्मार्टफोन की रेडिएशन से कैंसर हो जाता है

स्मार्टफोन को लेकर ये मिथ सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। अध्ययनों में सामान्य मोबाइल फोन के इस्तेमाल और कैंसर के बीच कोई ठोस संबंध साबित नहीं हुआ है। 
 

  • स्मार्टफोन नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोफ्रीक्वेंसी  तरंगें छोड़ते हैं, जिनमें डीएनए को सीधे नुकसान पहुंचाने जितनी ऊर्जा नहीं होती। 
  • इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर या फिर कैंसर होने का कोई भी लिंक नहीं मिला है। 
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आंखों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock Photos

मिथ: ब्लू लाइट आंखों को हमेशा के लिए खराब कर देती है

स्मार्टफोन से निकलने वाली ब्लू लाइट को बहुत नुकसानदायक माना जाता है। हालांकि ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि ब्लू लाइट आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचाती है। 
 

  • अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, इस बात का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचती है। हालांकि, लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से आंखों में सूखापन, तनाव और सिरदर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं।
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तनाव, स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Freepik.com

मिथ: स्मार्टफोन से दिमाग हो जाता है कमजोर

कई लोग मानते हैं कि स्मार्टफोन की रेडिएशन सीधे दिमाग को नुकसान पहुंचाती है या याददाश्त खत्म कर देती है।
 

  • वैज्ञानिक रूप से ऐसा साबित नहीं हुआ है। हालांकि यह जरूर सच है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया की लत  एकाग्रता, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। 
  • यदि आप देर रात तक फोन चलाते हैं, तो इससे नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे अगले दिन ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ सकता है। 
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