सर्दियों के मौसम में कई फल और सब्जियां बहुतायत में उपलब्ध होती हैं, जिन्हें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। आंवला भी ऐसा ही एक फल है, जिसे भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ के लिए सेवन किया जाता है। आंवले का अचार या मुरब्बा, न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, साथ ही इसके रोजाना सेवन को आंखों और त्वचा के साथ अन्य अंगों की सेहत भी बेहतर बनी रहती है। डायबिटीज जैसे रोग में विशेषज्ञ आंवले के जूस के सेवन की सलाह देते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि आंवले में कई ऐसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में उपलब्ध होते हैं, जिनको सेहत के विशेष आवश्यक माना जाता है।
आज का हेल्थ टिप्स: रोजाना खाइए बस एक आंवला, बिना दवा के दूर हो जाएंगी इन बीमारियों की जटिलताएं
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एंटीऑक्सिडेंट्स से होता है भरपूर
एंटीऑक्सिडेंट वह यौगिक होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स के प्रभाव से लड़ने में मदद करते हैं। माना जाता है कि एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर आहार कुछ प्रकार के कैंसर, हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह, उम्र बढ़ने के जोखिम को कम करने के साथ मस्तिष्क को होने वाली क्षति से बचाते हैं। आंवले में कई प्रकार के प्रभावी एंटीऑक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं, ऐसे में इसका सेवन बेहद फायदेमंद हो सकता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
आंवले के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। आंवला में फाइबर की उच्च मात्रा होती है जो आपके रक्त प्रवाह में शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने नहीं पाता है। इसके अलावा, टेस्ट-ट्यूब अध्ययनों से पता चलता है कि आंवले का अर्क अल्फा-ग्लूकोसिडेज़ अवरोधक है। इसका मतलब यह है कि यह आपकी छोटी आंत में विशेष एंजाइमों को प्रतिबंधित करता है, जिससे रक्त प्रवाह में शुगर का स्तर बढ़ने नहीं पाता।
आंवला जैसे फलों का सेवन हृदय रोग के खतरे को कम कर देता है। आंवले में एंटीऑक्सिडेंट और पोटेशियम जैसे कई पोषक तत्व होते हैं जो हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं ।एंटीऑक्सिडेंट रक्त में एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को रोककर हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है। आंवला का रोजाना सेवन लाभदायक माना जाता है।
इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद
आंवला का रस विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है, जो पानी में घुलनशील विटामिन है जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। एक समीक्षा के अनुसार, आंवले में 600-700 मिलीग्राम विटामिन-सी की मात्रा होती है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के खिलाफ कोशिकाओं की रक्षा के अलावा, विटामिन सी प्रतिरक्षा को बढ़ावा देता है।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।