Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
भारत में ऐसे गिने-चुने लोग ही होंगे, जो चाय नहीं पीते होंगे। यहां अक्सर लोगों की सुबह-सुबह या शाम में चाय पीने की आदत होती है। हालांकि कई लोगों की सुबह देर से सोकर उठने की आदत होती है, ऐसे में उन्हें दोबारा गर्म की हुई चाय पीनी पड़ती है। वैसे तो यह आम बात है, लेकिन अगर यह गलती रोजाना की जाए तो आगे चलकर यह आपके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि चाय को दोबारा गर्म करके पीना शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। अगर आप भी अक्सर ऐसी गलती करते हैं तो संभल जाएं। बेहतर यही होगा कि अगर आपका चाय पीने का मन कर रहा है तो दूसरी और फ्रेश चाय बनवा लें, दोबारा गर्म की हुई चाय पीने गलती भूलकर भी न करें। आइए जानते हैं दोबारा गर्म करके चाय पीने से शरीर को किस तरह के नुकसान हो सकते हैं?
अलर्ट: कहीं आप भी तो नहीं करते चाय को दोबारा गर्म करके पीने की गलती? ये आदत बिगाड़ सकती है सेहत
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बदल जाता है स्वाद
- चाय को दोबारा गर्म करके पीने का सबसे बड़ा नुकसान ये होता है कि इससे चाय का स्वाद बदल जाता है और साथ ही उसकी महक भी गायब हो जाती है। इसके अलावा दोबारा गर्म करने से चाय में मौजूद पोषक तत्व भी खत्म हो जाते हैं, ऐसे में चाय 'मीठे जहर' के समान हो जाती है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि चाय को दोबारा गर्म करके पीने से दस्त, उल्टी, पेट में ऐंठन, और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा ऐसी चाय पीने से आंत कमजोर होने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए चाय को गर्म करके पीने से पहले 10 बार जरूर सोच लें, क्योंकि आपकी ये छोटी सी गलती सेहत बिगाड़ सकती है।
चाय को दोबारा गर्म करने से जुड़ी खास बातें
- अगर चाय बनाए हुए केवल 15 मिनट ही हुए हैं और चाय ठंडी हो गई है तो उसे दोबारा गर्म करके पिया जा सकता है।
- अगर चाय को रखे हुए चार घंटे से अधिक का समय हो गया है तो उसे दोबारा गर्म करके पीने की गलती भूलकर भी न करें।
- बेहतर होगा कि एक बार में उतनी ही मात्रा में चाय बनाएं, जितने की जरूरत है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।