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अध्ययन: इस वजह से बच्चे मानसिक रूप से हो रहे हैं कमजोर, कोरोना महामारी के बाद और भी बढ़ गया है खतरा

Tue, 25 Jul 2023 02:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 25 Jul 2023 02:31 PM IST
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food-insecure households Children and adolescents at higher risk of mental health problems
बच्चों में बढ़ रही हैं मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : istock

मानसिक स्वास्थ्य विकार वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है, जिसका असर लगभग सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। डॉक्टर्स बताते हैं बच्चे भी मानसिक स्वास्थ्य विकारों के तेजी से शिकार हो रहे हैं। कम उम्र में मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याओं के कई दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं, ये क्वालिटी ऑफ लाइफ की भी समस्याओं को बढ़ाने वाली समस्या मानी जाती है।



कम उम्र में मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम के क्या कारण हैं, इसको समझने के लिए कैनेडियन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अध्ययन किया। हेल्थ सर्वे में पाया गया कि बच्चों में आहार की गुणवत्ता में कमी उनके लिए मानसिक स्वास्थ्य विकारों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों को स्वस्थ और पौष्टिक आहार देना सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ये सिर्फ शारीरिक ही नहीं उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।

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बच्चों में बढ़ रही है मानसिक समस्याएं - फोटो : istock

बच्चों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने 32,321 बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि खाद्य-असुरक्षित घरों में रहने वाले बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अन्य की तुलना में 55 फीसदी अधिक हो सकती हैं।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं मिलता है उनमें मानसिक स्वास्थ्य विकारों के गंभीर रूप लेने का भी जोखिम भी अधिक हो सकता है। 

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बच्चों में पोषण संबंधी समस्याएं - फोटो : iStock

क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

कनाडा में वेस्टर्न यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर केली एंडरसन कहती हैं, बच्चों का खानपान ठीक न होना न सिर्फ उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए समस्याओं को बढ़ाने वाली स्थिति है साथ ही ऐसे बच्चों के नशीले पदार्थों के सेवन की आशंका भी बढ़ सकती है। ये दोनों ही स्थितियां क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए समस्याकारक हैं।

इसका शारीरिक-मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।

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बच्चों में बढ़ती दिक्कतें - फोटो : i stock

कुपोषण के कारण बढ़ता जोखिम

शोधकर्ताओं का कहना है कि वैसे तो पहले से ही बच्चों में आहार की गुणवत्ता और पौष्टिकता को लेकर प्रश्नचिन्ह रहे हैं, पर कोविड-19 के बाद इसका जोखिम और भी अधिक हो गया है।

अध्ययनों से पता चलता है कि खाद्य असुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बीच संबंध अधिक जटिल हो सकती है। कई देशों में अब भी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, जिसका उनके संपूर्ण स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकता है। सभी माता-पिता को बच्चों के लिए आहार की गुणवत्ता को लेकर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।

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स्वस्थ और पौष्टिक आहार जरूरी - फोटो : istock

हरी सब्जियां-पौष्टिक आहार बच्चों के लिए बहुत आवश्यक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी माता-पिता को सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को आहार के माध्यम से पर्याप्त पोषण मिलता रहे। हरी सब्जियां, दूध, साबुत अनाज आदि चीजों को बच्चों के आहार में शामिल करें। कुछ शोध में पाया गया है कि जो बच्चे जंक-फास्ट फूड्स का सेवन अधिक करते हैं उनमें कई प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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