इनफर्टिलिटी यानी गर्भधारण न कर पाने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट कहती है कि दुनियाभर में हर 6 में से 1 व्यक्ति इससे परेशान है। भारत में भी ये चिंता लगातार देखी जा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में अभी लगभग 2.75 करोड़ कपल्स बांझपन की समस्या का सामना कर रहे हैं। बच्चे पैदा करने की उम्र वाले कपल्स में इसकी कुल दर 8% से 16.8% के बीच होने का अनुमान है।
इनफर्टिलिटी: शरीर में दिखने वाले ये बदलाव हो सकते हैं लो फर्टिलिटी का संकेत, आपमें भी तो नहीं हैं ऐसे लक्षण?
इनफर्टिलिटी की समस्या कई संकेत देती है जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। महिलाओं में अनियमित पीरियड्स और ओव्यूलेशन की गड़बड़ी, जबकि पुरुषों में शुक्राणुओं से जुड़ी समस्या गर्भधारण में बाधा बन सकती है।
शरीर पहले से देता है इनफर्टिलिटी का संकेत
बच्चा प्लान करने के बाद जब कई महीनों तक प्रेग्नेंसी नहीं ठहरती, तो ज्यादातर लोगों का ध्यान गर्भधारण की क्षमता पर जाता है। डॉक्टर कहते हैं, इनफर्टिलिटी की समस्या हमेशा अचानक सामने नहीं आती। कई बार शरीर पहले से ही कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य बदलाव समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
- महिलाओं में पीरियड्स का बार-बार अनियमित होना, कई महीनों तक पीरियड्स न आना या बहुत ज्यादा अंतर होना इस बात का संकेत हो सकता है कि हर महीने अंडा बनने और निकलने की प्रक्रिया यानी ओव्यूलेशन ठीक तरह से नहीं हो रही।
- वहीं पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या या उनकी गति कम होना भी गर्भधारण में परेशानी का कारण बन सकता है।
- अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि फर्टिलिटी की समस्या सिर्फ महिलाओं से जुड़ी नहीं होती। आधे मामलों में पुरुष भी इसका कारण हो सकते हैं।
महिलाएं किन संकेतों को लें गंभीरता से?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई लोगों में पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस), थायरॉयड की समस्या, वजन में बहुत ज्यादा बदलाव, एंडोमेट्रियोसिस, फैलोपियन ट्यूब में रुकावट और पुरुषों में शुक्राणु से जुड़ी समस्याएं भी इनफर्टिलिटी का कारण हो सकती हैं। इसलिए शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है।
- अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, बहुत लंबे अंतर पर आते हैं तो इसे सिर्फ सामान्य हार्मोनल बदलाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- इसका संबंध ओव्यूलेशन में गड़बड़ी से हो सकता है। ओव्यूलेशन का मतलब है अंडाशय से अंडे का बाहर निकलना।
- अगर यह प्रक्रिया नियमित नहीं है तो गर्भधारण की संभावना प्रभावित हो सकती है।
- अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के अनुसार, पीरियड्स अनियमित होने पर फर्टिलिटी की जांच पहले भी शुरू की जानी चाहिए।
पुरुषों में कौन से लक्षण दिखते हैं?
इनफर्टिलिटी की समस्या के लिए पुरुषों को भी जिम्मेदार माना जाता रहा है। पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति या गुणवत्ता में कमी गर्भधारण में परेशानी पैदा कर सकती है।
- कई बार इसका कोई साफ लक्षण दिखाई भी नहीं देता। कुछ लोगों में यौन समस्या, अंडकोष से जुड़ी परेशानी या हार्मोन से संबंधित बदलाव के संकेत दिख सकते हैं।
- इसके लिए सीमन एनालिसिस यानी वीर्य की जांच की जाती है।
- फर्टिलिटी टेस्ट में महिला और पुरुष दोनों की जांच जरूरी हो सकती है।
- अगर एक साल तक नियमित और बिना गर्भनिरोधक संबंध के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह पर जांच कराना जरूरी है।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
डॉक्टर कहते हैं, समय रहते इनफर्टिलिटी के कारणों को समझना और इसका उपचार कराना जरूरी है। अगर गर्भधारण में देरी के साथ पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, पहले से एंडोमेट्रियोसिस या गर्भाशय-फैलोपियन ट्यूब की समस्या है तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। बार-बार गर्भपात हो रहा है या पुरुष साथी में शुक्राणु से जुड़ी समस्या का संदेह है, तो भी डॉक्टर से जल्दी मिलना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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