दुनियाभर में हुए तमाम अध्ययनों में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी हथियार माना जा रहा है। अब तक मौजूद कोविड के तमाम टीकों को अध्ययनों में गंभीर संक्रमण से बचाव के लिए काफी असरदार पाया गया है। इसी दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए कनाडा सरकार ने दुनिया के पहले प्लांट-बेस्ड कोविड-19 वैक्सीन 'कोविफेन्ज' को उपयोग को मंजूरी दे दी है। क्यूबेक सिटी में स्थित मित्सुबिशी केमिकल और फिलिप मॉरिस के स्वामित्व वाली बायोफार्मा कंपनी मेडिकागो और ग्लैक्सो स्मिथ क्लिन ने इस वैक्सीन को तैयार किया है। इस वैक्सीन को कई मामलों में बेहद खास माना जा रहा है। यह न सिर्फ कनाडा की फर्म द्वारा विकसित पहला अधिकृत कोरोनावायरस टीका है, साथ ही यह पहला ऐसा टीका भी है जिसे प्लांट-आधारित प्रोटीन तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है।
Covid Vaccine: दुनिया की पहली पौधों पर आधारित वैक्सीन को मंजूरी, डेल्टा के खिलाफ 75 फीसदी असरदार, जानिए सबकुछ विस्तार से
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पौधों पर आधारित प्रोटीन तकनीक से की गई है विकसित
दुनियाभर में अब तक उपलब्ध कोरोना की वैक्सीन एमआरएनए, वायरल वेक्टर या निष्क्रिय कोरोनावायरस का उपयोग करके बनाई गई हैं। हालांकि कोविफेन्ज वैक्सीन इन सबसे अलग प्लांट-बेस्ड तकनीक का उपयोग करके तैयार की गई है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक यह वैक्सीन प्लांट बेस्ड वायरस जैसे कणों (वीएलपी) का उपयोग करके विकसित की गई है। सरल शब्दों में समझें तो वैक्सीन पौधों पर आधारित प्रोटीन का उपयोग करके ऐसे कणों को उत्पन्न करती है जो वायरल रोगज़नक़ से मिलते-जुलते हैं, जिसके आधार पर शरीर प्रतिरक्षा का निर्माण करती है।
कितनी असरदार पाई गई है वैक्सीन?
कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि अध्ययनों में इस वैक्सीन को काफी असरदार पाया गया है। दिसंबर में हुए वैक्सीन की प्रभाविकता के अध्ययन में इसे कोरोना के तमाम वैरिएंट्स के खिलाफ 71 फीसदी तक असरदार पाया गया है। इतना ही नहीं अब तक के सबसे संक्रामक और घातक पाए गए डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ इसे 75 फीसदी प्रभावी पाया गया है। इसके अलावा गामा वैरिएंट्स के खिलाफ इस वैक्सीन की प्रभाविकता 89 फीसदी के करीब की है।
क्या है कंपनी का दावा?
मेडिकागो की ओर से जारी आधिकारिक बयान में वैज्ञानिकों ने बताया कि पौधों से प्राप्त महत्वपूर्ण घटक का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया गया है। वीएलपी को पौधों की पत्तियों के अर्क से निकाला जाता है, इसके बाद इसे शुद्ध करके अंतिम रूप दिया जाता है। इसी रूप का उपयोग टीकों के निर्माण में किया जाता है। इस वैक्सीन को कोरोना के तमाम वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार पाया गया है। यह टीका कोरोना की इस महामारी युद्ध में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
वैक्सीन के बारे में इन बातों को भी जानिए
कंपनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक कोविफेन्ज़ दो-खुराक वाली वैक्सीन है। 21 दिनों के अंतराल पर इसके दोनों डोज दिए जा सकते हैं। अन्य वैक्सीनों की तरह ही इसके टीकों के बाद भी कुछ हल्के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं। कुछ संभावित दुष्प्रभावों में इंजेक्शन वाले स्थान पर लालिमा, खुजली और सूजन के साथ ठंड लगने, थकान, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, हल्का बुखार, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, मतली और दस्त जैसी दिक्कत हो सकती है। हालांकि ये सब 2-3 दिनों में स्वत: ठीक हो जाते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Medicago and GSK announce the approval by Health Canada of COVIFENZ®, an Adjuvanted Plant-Based COVID-19 Vaccine
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