कोरोना के इस दौर में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर के बाद लोगों में फाइब्रोमायल्जिया नामक समस्या के मामले काफी बढ़े हुए देखे जा रहे हैं। यह एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसमें लोगों को शारीरिक दर्द के साथ ही कई प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं। फाइब्रोमायल्जिया के कुछ लक्षण आमतौर पर गठिया के जैसे हो सकते हैं, जिसके कारण लोगों के लिए आसानी से इस समस्या का निदान कर पाना कठिन हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में दर्द के साथ इसमें रोगियों को थकान, तनाव, चिंता, नींद की समस्या और मूड स्विंग भी हो सकता है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मस्तिष्क में सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन रसायन में असंतुलन के कारण इस तरह की समस्या के विकसित होने का खतरा अधिक हो जाता है।
फाइब्रोमायल्जिया: इस रोग में शारीरिक-मानसिक दोनों तरह के हो सकते हैं लक्षण, कोरोना में बढ़ गए हैं मामले
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फाइब्रोमायल्जिया की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। शारीरिक समस्याओं के साथ इसमें रोगी को मानसिक दिक्कतों का भी अनुभव होता है। अक्सर लोगों को इसके लक्षण समझ नहीं आते हैं, जिन्हें जानना और समझना आवश्यक है।
- शरीर के किसी हिस्से में गंभीर दर्द की समस्या।
- जबड़ों में दर्द और जकड़न।
- चेहरे की मांसपेशियों और आस-पास के ऊतकों में दर्द और थकान
- सुबह में जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न
- सिरदर्द
- नींद के पैटर्न में दिक्कत।
- इरेटबल बाउल सिंड्रोम।
- मासिक धर्म के समय दर्द की समस्या।
- हाथों और पैरों में झुनझुनी और सुन्नता।
- ठंड या गर्मी के प्रति संवेदनशीलता
- स्मृति और एकाग्रता की समस्या जिसे "फाइब्रो-फॉग" के रूप में जाना जाता है।
- तनाव या अवसाद की समस्या।
फाइब्रोमायल्जिया के कारण अब तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि, रुमेटोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि मस्तिष्क में कुछ दिक्कतों के कारण यह समस्या हो सकती है। फाइब्रोमायल्जिया की समस्या वंशानुगत भी हो सकती है। रुमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूपस या स्पाइनल आर्थराइटिस वाले लोगों में फाइब्रोमायल्जिया विकसित होने का अधिक जोखिम होता है। इसके कुछ और जोखिम कारक भी हो सकते हैं, जिनपर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
- कोई ऐसी दुर्घटना जिसका असर शारीरिक या भावनात्मक दोनों ही तरह से हुआ हो।
- बार-बार एक ही जगह पर लगने वाली चोट।
- रुमेटाइड आर्थराइटिस या अन्य ऑटोइम्यून रोग जैसे ल्यूपस
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) की समस्याएं
फाइब्रोमायल्जिया का क्या इलाज है?
फाइब्रोमायल्जिया के लक्षणों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है, ऐसे में इसके लिए डॉक्टरी सलाह लेना आवश्यक है। चूंकि यह एक सिंड्रोम है ऐसे में हर रोगी में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं। कुछ रोगियों को आवश्यकतानुसार एक्यूपंक्चर, मनोचिकित्सा, बिहेवियर मोडिफिकेशन थेरपी या फिजियोथेरपी की भी आवश्यकता हो सकती है। रोगियों के लक्षण के आधार पर दवाइयों अथवा व्यायाम से इसे ठीक किया जा सकता है।
फाइब्रोमायल्जिया की रोकथाम और बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को फाइब्रोमायल्जिया की समस्या होती है, उन्हें आहार पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। ऐसे रोगियों को उन चीजों का सेवन करना चाहिए जो फाइबर में तो भरपूर हों लेकिन उनमें शुगर की मात्रा कम हो। साल 2014 के एक अध्ययन से पता चलता है कि ग्लूटेन संवेदनशीलता के कारण भी फाइब्रोमायल्जिया की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में रोगियों को उन आहार का सेवन करना चाहिए जो ग्लूटेन फ्री हों।
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स्रोत और संदर्भ:
Fibromyalgia is a common neurologic health problem
अस्वीकरण नोट: यह लेख मेडिकल जर्नल से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।