हम अक्सर किसी बीमारी को तभी गंभीरता से लेते हैं, जब उसके लक्षण साफ दिखाई देने लगें या उसके कारण सेहत को दिक्कतें बढ़ जाएं। लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं जो लंबे समय तक बिना किसी खास संकेत के शरीर के अंदर बढ़ती रहती हैं। फैटी लिवर भी ऐसी ही एक समस्या है। लिवर की ये बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है और हर उम्र के लोग इसका शिकार देखे जा रहे हैं।
चिंताजनक: बच्चे भी हो रहे लिवर की इस साइलेंट बीमारी का शिकार, सभी माता-पिता को डॉक्टरों ने किया सावधान
World Congress of Gastroenterology 2026: भारत में फैटी लिवर के बढ़ते मामले चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 100 भारतीय वयस्कों में से करीब 39 को यह समस्या है, जबकि बच्चों में अनुमान 35.4 प्रतिशत है। मोटापा और डायबिटीज इसका खतरा बढ़ाते जा रहे हैं।
पाचन तंत्र की समस्याओं को लेकर विशेषज्ञों ने किया अलर्ट
विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस-2026 (30 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026) में 61 देशों के करीब 3,000 विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य समस्याओं पर मंथन किया। चार दिवसीय विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस भारत में पहली बार हो रही है। इसका विषय पाचन तंत्र के स्वास्थ्य में बदलाव, प्रकृति का संरक्षण है। लिवर और पाचन तंत्र की बीमारियों की पहचान और इलाज में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
- इसमें विशेषज्ञों ने बताया कि भारत के 100 में से 39 वयस्कों को फैटी लिवर की समस्या है। चिंताजनक बात ये है कि बच्चे भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। भारतीय बच्चों में भी यह अनुमान 35.4 % है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि चूंकि फैटी लिवर के शुरुआती चरण में अक्सर साफ लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए इसको लेकर चिंता और बढ़ जाती है।
- मोटापा, डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी इस बीमारी को बढ़ाती जा रही हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि फैटी लिवर डिजीज के साथ पाचन संबंधी समस्याएं भी कितनी आम हो चुकी हैं, इसपर भी विशेषज्ञों ने चर्चा की। यानी पेट से जुड़ी छोटी लगने वाली परेशानियां भी लंबे समय में बड़ी समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। एम्स के विशेषज्ञों ने बताया कि दुनिया में हर तीन में एक व्यक्ति को कब्ज, दस्त या दूसरी पाचन संबंधी शिकायतों का सामना करना पड़ता है।
कार्यक्रम के पहले दिन (30 सितंबर) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश में लिवर और पाचन तंत्र की बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है, जिसे लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
फैटी लिवर अब केवल बड़ों तक सीमित समस्या नहीं रह गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय बच्चों में भी फैटी लिवर का खतरा बढ़ रहा है, जिसका अनुमान 35.4 प्रतिशत है। बच्चों में मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण ये बीमारी बढ़ती जा रही है। ऐसे में सभी माता-पिता को बच्चों के खान-पान, शारीरिक गतिविधि और बढ़ते वजन पर ध्यान देना जरूरी है। इसे केवल वजन बढ़ने की सामान्य समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
- विशेषज्ञों ने फैटी लिवर को मोटापा, डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़ी दूसरी समस्याओं के साथ जुड़ा हुआ बताया है।
- हाई कैलोरी वाला खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता वजन शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं।
- इसलिए फैटी लिवर से बचाव की बात केवल लिवर पर ही नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
कब्ज-पेट फूलने की अनदेखी ठीक नहीं
शोधकर्ताओं ने बताया कि हमारे पाचन तंत्र से जुड़ी एक बेहद आम और क्रोनिक बीमारी- आईबीएस (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) के लिए डीप लर्निंग, सीलिएक रोग की बायोप्सी की मात्रा आधारित जांच और अग्न्याशय की गांठों की एआई आधारित जांच पर काम चल रहा है। लंबे समय तक रहने वाली सूजन और अग्न्याशय के कैंसर में भी एआई के इस्तेमाल की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, कब्ज-पेट फूलने को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। एम्स विशेषज्ञों ने बताया कि मल में खून आना और निगलने में परेशानी ऐसे संकेत हैं, जिनपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
एआई आधारित जांच पर चल रहा काम
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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