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Diabetes Risk: आंखें बताती हैं कहीं आपको शुगर की बीमारी तो नहीं? ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सावधान

Mon, 22 Dec 2025 08:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 22 Dec 2025 08:01 PM IST
सार

  • डायबिटीज दुनियाभर में अंधेपन के मुख्य कारणों में से एक है। आंखों में इसका असर अक्सर दूसरे किसी भी दिखने वाले लक्षणों से पहले दिखाई देते हैं। डायबिटीज के कारण आंखों में होने वाली समस्या को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।

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Eye Changes Early Signs of Diabetes Know Symptoms Blood Sugar diabetic retinopathy
आंखों में समस्या - फोटो : Adobe Stock

डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है। भारत में तो इस रोग की वृद्धि इतनी है कि इसे 'डायबिटीज कैपिटल' तक कहा जाने लगा है। द लैंसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार आईसीएमआर-इंडियाबी के अध्ययन में पाया गया कि साल 2023 में देश में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज का शिकार थे, वहीं 13 करोड़ से अधिक लोगों को प्रीडायबिटिज की समस्या थी, जो भविष्य में इस रोग की चपेट में आ सकते थे।



देश में डायबिटीज़ की दर लगभग 11.4% बताई गई, जिसमें शहरों और गांवों के बीच बड़ा अंतर है। अब ग्रामीण इलाकों में भी मामले बढ़ रहे हैं, जिसके लिए रोकथाम और कंट्रोल के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की जरूरत है।

गलत खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता तनाव और बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र के लोग भी इस बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं। शोध बताते हैं कि भारत में टाइप-2 डायबिटीज के मामले युवाओं में लगातार बढ़ रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इसके संकेतों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, इस रोग के लक्षणों को लेकर सभी लोगों को सावधान रहना चाहिए। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही है उनमें डायिटीज का खतरा और अधिक हो सकता है।

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डायबिटीज और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com

डायबिटीज और इसका खतरा

डायबिटीज की बीमारी में शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से ज्यादा हो जाता है। यह तब होता है, जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या बना हुआ इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता। इंसुलिन का काम खून में मौजूद शुगर को ऊर्जा में बदलना होता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो शुगर खून में ही जमा होने लगती है और धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाती है।

इस रोग के शुरुआती संकेत अक्सर हल्के होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। बार-बार प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना इसके सबसे आम लक्षण माने जाते हैं। इसके अलावा, बिना किसी खास कारण के वजन कम होना, हर समय थकान महसूस होना और काम में मन न लगना भी डायबिटीज की ओर इशारा कर सकता है।

क्या आप जानते हैं आंखें भी संकेत देती हैं कि आपको डायबिटीज हो गया है?

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आंखों में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

डायबिटीज के कारण आंखों की समस्या

अध्ययनकर्ता बताते हैं, डायबिटीज दुनियाभर में अंधेपन के मुख्य कारणों में से एक है। आंखों में इसका असर अक्सर दूसरे किसी भी दिखने वाले लक्षणों से पहले दिखाई देते हैं। डायबिटीज के कारण आंखों में होने वाली समस्या को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। समय के साथ हाई ब्लड शुगर के कारण रेटिना में छोटी रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचने लगती है।

अक्सर धुंधली दिखना, फ्लोटर्स, काले धब्बे, रतौंधी और रंगों की पहचान करने में दिक्कत होना डायबिटीज का संकेत हो सकता है। हाई ब्लड शुगर के कारण रेटिना में खून की नसों को नुकसान पहुंचने लगती है, जिसके कारण फ्लूइड लीक होने (मैकुलर एडिमा) या लेंस के धुंधले होने (मोतियाबिंद) का खतरा हो सकता है।

अगर आपको भी इस तरह की कोई समस्या हो रही है तो तुरंत आंखों की जांच करवानी चाहिए।

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डायबिटीज को रखें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com

शुगर को कंट्रोल में रखना जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज और इसके कारण आंखों को होने वाली समस्याओं से बचे रहने के लिए आंखों का डाइलेटेड एग्जाम कराना जरूरी है। 

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना डायबिटिक रेटिनोपैथी और इसके कारण होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए जरूरी है। आंखों को होने वाले नुकसान के खतरे को 60% तक कम करने के लिए एचबीए1सी लेवल को 7% से नीचे बनाए रखने की सलाह देते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन को नियंत्रित रखना और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करवाकर डायबिटीज से बचाव संभव है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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