दुनियाभर में हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज और फेफड़े की बीमारियों को मृत्यु के प्रमुख जोखिम कारक के रूप में जाना जाता है, हालांकि कुछ स्थितियां बीमारी न होते हुए भी हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बन रही हैं। वैश्विक स्तर पर साल दर साल बढ़ता तापमान उनमें से ही एक है।
अध्ययन में चेतावनी: बीमारी न होते हुए भी इस समस्या के कारण हर साल लाखों लोगों की हो रही है मौत, हालात और भी बिगड़ने की आशंका
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बढ़ते तापमान के साथ बढ़ रही है मृत्युदर
बढ़ते तापमान के खतरे को जानने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि साल 2000 से 2019 के बीच वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों का 3.4 प्रतिशत, तापमान परिवर्तनशीलता के कारण है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताते हुए कहा है कि अगर तापमान बढ़ने की दर इसी तरीके से जारी रही तो आने वाले वर्षों में मौत का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है इस बढ़ते मृत्यु के जोखिम को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्य उपाय किए जाने की आवश्यकता है, वरना यह एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरती हुई देखी जा रही है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाली टीम ने 43 देशों के 750 स्थानों से तापमान परिवर्तनशीलता और मृत्यु दर के बीच संबंध का पता लगाया। टीम ने पाया कि एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में तापमान अधिक होने के कारण मौत के मामले सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। हर दशक के आधार पर देखें तो ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 7.3 प्रतिशत, यूरोप में 4.4 प्रतिशत और अफ्रीका 3.3 प्रतिशत की दर से मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह वैश्विक चिंता का विषय है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
बढ़ते तापमान के जोखिम के बारे में बताते हुए मोनाश क्लाइमेट, वायु गुणवत्ता अनुसंधान के निदेशक प्रोफेसर युमिंग गुओ कहते हैं, जलवायु परिवर्तन 21वीं सदी की सबसे प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं में से एक है। हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि वायु प्रदूषण की तरह ही बढ़ते तापमान के कारण मृत्यु दर बढ़ने का खतरा है। तापमान तेजी से अस्थिर होता जा रहा है, जिससे कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ गया है। मानव और पशु दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए काउंटरमेजर्स की आवश्यकता है।
अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और भी विकराल हो सकते हैं। जलवायु से संबंधित खतरों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कई नीतियां बनाई गई हैं, हालांकि, तापमान परिवर्तनशीलता के स्वास्थ्य पर पड़ते नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए न ही कोई खास नीति है न ही इस तरफ ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। जबकि आंकड़े साफ बताते हैं कि यह बड़े जानलेवा खतरे के रूप में उभरती गंभीर समस्या है।
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स्रोत और संदर्भ:
Global, regional, and national burden of mortality associated with short-term temperature variability from 2000–19: a three-stage modelling study
अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।