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8 घंटे से भी ज्यादा ऑफिस में बैठते हो तो ये खबर जरूर पढ़ लें, खतरनाक बीमारी से बच जाएंगे
ऊर्जा डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 21 Feb 2018 09:30 AM IST
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office syndrome
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आप हर दिन फ्रेश मूड से टाइम पर ऑफिस पहुंचने के लिए घर से निकलते होंगे। जाने का समय तो तय होता होगा, लेकिन घर लौटने का नहीं। आठ घंटे की ड्यूटी को 13 से 14 घंटे तक करते होंगे। सारा दिन शीशे के एक बंद ऑफिस में लगातार अपने डेस्क पर बैठे कंप्यूटर, फाइलों और फोन में लगे रहते होंगे। कई बार काम का दबाव इतना बढ़ जाता होगा कि दिमाग और मन दोनों खीझ उठता होगा। जल्दबाजी में कोई भी काम ठीक से नहीं होता होगा। यदि ऐसा लगातार हो रहा है, तो फिर आप 'ऑफिस सिंड्रोम' से ग्रस्त हैं।
office syndrome
क्या हैं इसके लक्षण:
ऑफिस सिंड्रोम होने पर आपको सिरदर्द, कमर और कंधों में दर्द, उंगलियों, कलाइयों और हाथों में दर्द, पैरों और कलाइयों में सुन्नता, ड्राई आइज, आखों का चौंधियाना, मांसपेशियों में दर्द, तनाव आदि लक्षण देखे जा सकते हैं। हालांकि, जरूरी नहीं कि ये सभी लक्षण होने पर आपको ऑफिस सिंड्रोम की समस्या हो ही। ये किन्हीं अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। कुछ बातों को अपना कर ऑफिस सिंड्रोम को रोका जा सकता है।
आप कंप्यूटर पर अधिक देर तक काम करते हैं, तो कोशिश करें कि कंप्यूटर स्क्रीन और आपकी आंखों की ऊंचाई समान स्तर पर हो। साथ ही कुर्सी की ऊंचाई न तो बहुत कम और न ही बहुत ज्यादा हो। अपने कंप्यूटर के डिस्प्ले एंगल को पांच से बीस इंच और आपके एवं कंप्यूटर के बीच की दूरी लगभग 18 से 30 इंच होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर आंखों में दर्द, तनाव और पानी आने का कारण भी यही है। आपके डेस्क की ऊंचाई जितनी है, उतनी ही आपकी कुर्सी के हाथ वाले हिस्से की ऊंचाई भी हो। तभी आपकी कोहनी कीबोर्ड या माउस के इस्तेमाल के दौरान सही पोजीशन में रहेगी।
ऑफिस सिंड्रोम होने पर आपको सिरदर्द, कमर और कंधों में दर्द, उंगलियों, कलाइयों और हाथों में दर्द, पैरों और कलाइयों में सुन्नता, ड्राई आइज, आखों का चौंधियाना, मांसपेशियों में दर्द, तनाव आदि लक्षण देखे जा सकते हैं। हालांकि, जरूरी नहीं कि ये सभी लक्षण होने पर आपको ऑफिस सिंड्रोम की समस्या हो ही। ये किन्हीं अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। कुछ बातों को अपना कर ऑफिस सिंड्रोम को रोका जा सकता है।
आप कंप्यूटर पर अधिक देर तक काम करते हैं, तो कोशिश करें कि कंप्यूटर स्क्रीन और आपकी आंखों की ऊंचाई समान स्तर पर हो। साथ ही कुर्सी की ऊंचाई न तो बहुत कम और न ही बहुत ज्यादा हो। अपने कंप्यूटर के डिस्प्ले एंगल को पांच से बीस इंच और आपके एवं कंप्यूटर के बीच की दूरी लगभग 18 से 30 इंच होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर आंखों में दर्द, तनाव और पानी आने का कारण भी यही है। आपके डेस्क की ऊंचाई जितनी है, उतनी ही आपकी कुर्सी के हाथ वाले हिस्से की ऊंचाई भी हो। तभी आपकी कोहनी कीबोर्ड या माउस के इस्तेमाल के दौरान सही पोजीशन में रहेगी।
office syndrome
कुर्सी पर पैर चढ़ाकर न बैठें। पैरों को फर्श पर लटकने दें। यह तो रही सही तरीके से बैठने की बात। यदि आपको लगातार सिरदर्द या फिर कमर में दर्द रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। काम को लेकर तनाव या दबाव बहुत ज्यादा है, तो बेहतर है कि आप कुछ दिनों की छुट्टी लेकर कहीं सैर कर आएं। इससे आपको तरोताजा व रिलैक्स महसूस होगा।
हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शीशे से बंद एयर कंडीशनिंग वाले ऑफिस आपको बेशक आरामदायक महसूस होते हों, लेकिन ये आपकी हड्डियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे ऑफिसेज न सिर्फ ताजी हवा, बल्कि धूप से भी लोगों को वंचित करते हैं। इस वजह से शरीर में विटामिन-डी की कमी होने लगती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। व्यस्त दिनचर्या और आधुनिक संसाधनों के कारण लोग धूप नहीं ले पाते। लोगों का पार्क में घूमना-फिरना कम हो गया, इसलिए घर पर आकर कम वक्त एसी में बिताएं।
विशेषज्ञ कहते हैं...
फिजिशियन, डॉ. पुलिन के गुप्ता के मुताबिक, काम करना अच्छी बात है, लेकिन उतना ही जरूरी है, अपने शरीर पर ध्यान देना भी। स्वस्थ रहने के लिए यह सबसे पहली शर्त है। ऑफिस सिंड्रोम से बचना चाहते हैं, तो वर्कहॉलिक न बनें। अपनी कुर्सी से बीच-बीच में उठते रहें। खुली हवा में सांस लें।
हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शीशे से बंद एयर कंडीशनिंग वाले ऑफिस आपको बेशक आरामदायक महसूस होते हों, लेकिन ये आपकी हड्डियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे ऑफिसेज न सिर्फ ताजी हवा, बल्कि धूप से भी लोगों को वंचित करते हैं। इस वजह से शरीर में विटामिन-डी की कमी होने लगती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। व्यस्त दिनचर्या और आधुनिक संसाधनों के कारण लोग धूप नहीं ले पाते। लोगों का पार्क में घूमना-फिरना कम हो गया, इसलिए घर पर आकर कम वक्त एसी में बिताएं।
विशेषज्ञ कहते हैं...
फिजिशियन, डॉ. पुलिन के गुप्ता के मुताबिक, काम करना अच्छी बात है, लेकिन उतना ही जरूरी है, अपने शरीर पर ध्यान देना भी। स्वस्थ रहने के लिए यह सबसे पहली शर्त है। ऑफिस सिंड्रोम से बचना चाहते हैं, तो वर्कहॉलिक न बनें। अपनी कुर्सी से बीच-बीच में उठते रहें। खुली हवा में सांस लें।