अल्जाइमर रोग, मस्तिष्क से संबंधित तेजी से बढ़ती बीमारी है, जिसे डिमेंशिया का प्रमुख कारक माना जाता है। अमेरिका में, लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) लोग इस रोग से प्रभावित हैं और दुनियाभर में इसके 24 मिलियन से अधिक रोगी होने की आशंका है। मस्तिष्क की इस बीमारी के कारण समय के साथ याददाश्त कम होने, विचारों की समस्या, भ्रम की स्थिति हो सकती है। अल्जाइमर का अगर समय पर इलाज न हो पाए तो इसके कारण डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में भी इस रोग के मामले पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं।
Study: मस्तिष्क में खून का संचार बढ़ाकर अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया के जोखिमों को कम कर सकती है ये दवा
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वियाग्रा से मिल सकता है लाभ
न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन पुरुषों को वियाग्रा या इसी तरह की दवाएं दी गईं, उनमें अल्जाइमर रोग या डिमेंशिया होने का खतरा 18 प्रतिशत कम था। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने उन लोगों में अल्जाइमर का जोखिम 44 प्रतिशत कम पाया, जिन्हें अध्ययन के दौरान 21 से 50 बार वियाग्रा की गोलियां दी गईं।
शोधकर्ताओं ने बताया, कई देशों में अल्जाइमर रोग के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। अगर संयमित मात्रा में, रोगी की अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ये दवा दी जाए तो इस मस्तिष्क के खतरे को कम किया जा सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए 2.60 लाख से अधिक प्रतिभागियों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया था, जिन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या थी। हालांकि उनमें स्मृति हानि या अल्जाइमर की समस्या का कोई सबूत नहीं था। इनमें से आधे से अधिक लोग PDE5 अवरोधक दवाओं (वियाग्रा) का सेवन कर रहे थे। प्रतिभागियों का पांच वर्षों तक फॉलोअप किया गया।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. रूथ ब्राउर कहती हैं, ये दवाएं मस्तिष्क में असामान्य प्रोटीन को कम करने में मदद कर सकती है, जो अल्जाइमर रोगियों में अधिक देखी जाती है।
मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करती हैं ये दवाएं
PDE5 अवरोधक दवाओं को मूल रूप से एनजाइना और उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए विकसित किया गया था, लेकिन समय के साथ इसके प्रभावों को देखते हुए इरेक्टाइल डिस्फंक्शन वालों में भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। जानवरों पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे अल्जाइमर से बचाव में मदद मिल सकती है। PDE5 अवरोधक सीजीएमपी नामक यौगिक के स्तर को बढ़ाते हैं, जो मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करने में भी मदद कर सकती है। ऐसे में इसके इस्तेमाल से अल्जाइमर रोग का खतरा कम हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया, PDE5 अवरोधक के इस्तेमाल को समझने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। यदि PDE5 अवरोधकों से अल्जाइमर में लाभ के प्रमाण मिलते हैं तो इससे पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी मदद मिल सकती है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डॉ. इवान कोयचेव ने कहा, अध्ययन के परिणाम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि डिमेंशिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का सेवन नहीं किया जाना चाहिए, इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Phosphodiesterase Type 5 Inhibitors in Men With Erectile Dysfunction and the Risk of Alzheimer Disease
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