उम्र बढ़ने के साथ हमारी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर होना शुरू हो जाता है। डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां ज्यादा प्रभावी तरीके से सेहत को प्रभावित करने लग जाती है, वहीं उम्र बढ़ने के साथ मेंटल हेल्थ पर भी असर होने लग जाता है।
मेंटल हेल्थ का मामला: बेचैनी में खुद को बंधवाते थे रस्सियों से, कभी घंटों टहलते तो कभी पी जाते कई लीटर पानी
Elderly Mental Health: पूर्वी दिल्ली के 71 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर मानसिक बेचैनी और चिंता से परेशान थे। राहत पाने के लिए वे खुद को रस्सियों से बंधवाने और अत्यधिक पानी पीने लगे थे। इहबास में चार सप्ताह के उपचार, दवाओं और काउंसलिंग से उनकी हालत सुधरी। जानिए पूरा मामला
खुद को रस्सियों से बंधवाने पर मिलता था सुकून
उम्र 71 साल, मन में हजारों आशंकाएं और बेचैनी इतनी कि खुद को रस्सियों से बंधवाने पर ही सुकून मिलता था। कभी लगातार टहलते रहते, तो कभी बेचैनी कम करने के लिए एक साथ कई लीटर पानी पी जाते। परिवार की सलामती, आर्थिक सुरक्षा, अपनी सेहत और भविष्य की चिंता ने उन्हें इस कदर घेर लिया कि सामान्य जीवन मुश्किल हो गया।
यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि पूर्वी दिल्ली स्थित मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) में सामने आया एक मामला है। यहां डॉक्टरों ने चार सप्ताह के उपचार से बुजुर्ग की हालत में ऐसा सुधार किया कि उन्हें खुद को बांधने की जरूरत ही नहीं रही।
- डॉक्टरों ने मानसिक स्थिति, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता की जांच के बाद पैनिक अटैक और जनरलाइज्ड एंजायटी डिसऑर्डर (जीएडी) की पहचान की।
- इस विकार में व्यक्ति छोटी-बड़ी बातों को लेकर लगातार चिंतित रहता है और चाहकर भी चिंता पर काबू नहीं कर पाता।
- बुजुर्ग को चार सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रखकर दवाओं, विश्राम संबंधी व्यायाम और नियमित दिनचर्या के जरिए उपचार दिया गया।
- परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग भी की गई। इलाज के बाद स्ट्रेस का स्कोर 40 से घटकर 17 रह गया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इहबास के जेरियाट्रिक मेंटल हेल्थ विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. ओम प्रकाश और डॉ. श्रेयशी कोनर के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग करीब एक साल से लगातार चिंता और मानसिक बेचैनी से जूझ रहे थे। कभी उन्हें अपनी सेहत बिगड़ने का डर सताता, तो कभी परिवार की भलाई और आर्थिक भविष्य की चिंता परेशान करती। बढ़ती उम्र में दूसरों पर निर्भर होने और मृत्यु का भय भी उनकी बेचैनी बढ़ा रहा था।
- बुजुर्ग को दिन में एक-दो बार तेज बेचैनी जैसा दौरा पड़ता था। यह 30 से 45 मिनट तक चलता था। इस दौरान वह एक जगह बैठ नहीं पाते और लगातार टहलते रहते थे।
- मन की उथल-पुथल से राहत पाने का कोई रास्ता नहीं सूझता,तो परिवार के सदस्यों से उन्हें बिस्तर पर रस्सियों से बांधने की गुहार लगाते थे।
पैनिक अटैक और जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है?
पैनिक अटैक अचानक होने वाली तेज घबराहट और डर की स्थिति है। इसमें बिना किसी स्पष्ट खतरे के आपको लग सकता है कि आपके साथ कुछ बुरा होने वाला है या उसकी जान खतरे में है। इस स्थिति में दिल की धड़कन तेज होने, पसीना आने, सांस फूलने, चक्कर आने और सीने में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके कुछ अजीब लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे दुनिया सपने जैसी लगना, खुद को अपने शरीर से अलग महसूस करना, गले में कुछ अटकने का एहसास, हाथ-पैर सुन्न होना और अचानक मौत का डर सताना।
जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है?
जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर एक मानसिक समस्या है, जिसमें आपको परिवार, नौकरी, पैसे, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर लगातार जरूरत से ज्यादा चिंता होती रह सकती है। कई बार सब कुछ ठीक होने के बावजूद मन में अनहोनी का डर बना रहता है। बेचैनी, चिड़चिड़ापन, थकान, नींद न आना और मांसपेशियों में तनाव इसके प्रमुख लक्षण हैं।
जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण कई बार लोगों को बार-बार मुंह सूखने, गले में गांठ जैसा महसूस होने, पेट खराब रहने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
पैनिक अटैक और एंग्जायटी के लक्षण दिखें तो क्या करें?
पैनिक अटैक और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को कंट्रोल करने के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं।
- घबराहट होने पर आराम से बैठें और धीरे-धीरे सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें।
- बेचैनी या डर महसूस होने पर परिवार के सदस्य या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। रोजाना कुछ समय ध्यान और रिलैक्सेशन के लिए निकालें।
- अपनी क्षमता के अनुसार 20-30 मिनट पैदल चलें। नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव कम करने में मदद करती है।
- रोजाना 7-9 घंटे सोने की आदत बनाएं और सोने-जागने का समय तय रखें।
- कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स का अधिक सेवन घबराहट बढ़ा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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