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कोरोना से जंग में इस दवा ने फिर जगाई उम्मीद, इबोला के इलाज में भी हुई थी कारगर

Fri, 01 May 2020 09:13 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Fri, 01 May 2020 09:13 AM IST
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Ebola Virus Medicine Remdesivir Has Become New Hope For Coronavirus treatment of covid 19 patients
प्रतीकात्मक फोटो

अमेरिका ने कोविड 19 बीमारी के उपचार के लिए रेमडेसिवीर दवा पर भरोसा जताते हुए कहा है कि इस बात के स्पष्ट सबूत मिले हैं कि ये दवा कोविड 19 के मरीजों को ठीक कर सकती है। इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल में ये बात सामने आई है कि दवा के प्रयोग से मरीजों में लक्षण 15 दिन की जगह 11 दिन के अंदर दिखने लग जाते हैं। हालांकि, अब तक इस दवा पर हुई जांच को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।



विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर इस दवा से जुड़े दावों की पुष्टि होती है तो मौजूदा दौर की एक बेहतरीन खबर होगी। लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि ये दवा इस बीमारी के लिए जादुई पुड़िया की तरह नहीं है। इस दवा से लोगों की जान बचाने की क्षमता विकसित होगी, अस्पतालों पर बोझ कम किया जा सकेगा और कुछ जगहों पर लॉकडाउन हटाए जा सकेगा।

Ebola Virus Medicine Remdesivir Has Become New Hope For Coronavirus treatment of covid 19 patients
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

कहां से आई है ये दवा?
इस दवा को दरअसल, इबोला के इलाज के लिए विकसित किया गया था। ये एक एंटीवायरल दवा है। कोई भी वायरस जब इंसानी शरीर में जाता है तो वह अपने आपको मजबूत करने के लिए खुद को रेप्लीकेट यानी अपनी दूसरी प्रतियां तैयार करता है। और ये इंसान के शरीर की कोशिकाओं में होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में वायरस को एक एंजाइम की जरूरत होती है। ये दवा इसी एंजाइम पर हमला करके वायरस के रास्ते में एक तरह का रोड़ा बनती है।

अमेरिका में इस दवा का ट्रायल अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान में हुआ है। इस ट्रायल में 1063 लोगों ने भाग लिया था। इनमें से कुछ मरीजों को ये ड्रग दिया गया। वहीं, कुछ मरीजों को पेलेसिबो दी गई। दवाओं की दुनिया में प्लेसीबो से आशय उस चीज से है जिसमें कोई भी मेडिकल गुण नहीं होते हैं। इनमें पानी और शक्कर की गोली जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।

Ebola Virus Medicine Remdesivir Has Become New Hope For Coronavirus treatment of covid 19 patients
प्रतीकात्मक तस्वीर

कितनी कामयाब है ये दवा?
अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान के प्रमुख डॉ। एंथनी फाउची ने कहा है कि ट्रायल के आंकड़े बताते हैं कि ये दवा कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों के ठीक होने में प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने कहा है कि दवा वायरस को ब्लॉक कर सकती है और ये बता रही थी कि हमारे पास अब वह रास्ता होगा कि हम मरीजों का इलाज कर सकते हैं।

हालांकि, इस दवा का कोविड 19 से होने वाली मौतों पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं पड़ा है। वो लोग जिन्हें ये दवा दी गई, उनमें मृत्यु दर 8 फीसदी थी। वहीं, जिन्हें प्लेसीबो दिया गया, उनमें 11.6 फीसदी थी। लेकिन ये नतीजे सांख्यिकीय आधार से अहम नहीं हैं। इसका मतलब ये हुआ कि वैज्ञानिक ये बताने में सक्षम नहीं हैं कि मृत्यु दर में जो अंतर है, उसका आकलन सही भी है या नहीं।

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Ebola Virus Medicine Remdesivir Has Become New Hope For Coronavirus treatment of covid 19 patients
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

यह स्पष्ट नहीं है कि किसे फायदा हो रहा है।

  • क्या यह उन लोगों को और जल्दी ठीक होने में मदद कर रहा है, जो कि बिना दवा के भी ठीक हो जाते?
  • दवा कम या ज्यादा किस उम्र वर्ग के लोगों में बेहतर काम करती है?
  • ये बीमारी लोगों को आईसीयू में जाने से बचा रही है?
  • ये दवा युवाओं और वृद्धों के साथ बेहतर काम करती है?
  • या फिर ये दवा बीमार या स्वस्थ लोगों में से किस पर अच्छा असर डालती है?
  • क्या मरीजों का शुरुआती स्तर पर ही ध्यान रखना होगा जब वायरस अपने चरम पर होता है?

जब इस दवा से जुड़ी विस्तृत जानकारी जारी की जाएगी, तब इस तरह का विशेष सवालों के जवाब सामने आएंगे। क्योंकि इस दवा से लोगों की जिंदगियां बचाने के साथ-साथ लॉकडाउन हटाए जाने जैसे फायदे हो सकते हैं।

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Ebola Virus Medicine Remdesivir Has Become New Hope For Coronavirus treatment of covid 19 patients
Medicine

लंदन के यूसीएल कॉलेज में एमआरसी क्लिनिकल ट्रायल यूनिट के निदेशक प्रोफेसर महेश परमार कहते हैं, "इस दवा के व्यापक ढंग से उपलब्ध होने से पहले कई चीजें स्पष्ट होना जरूरी है। इससे जुड़े डेटा और नतीजों की नियामकों द्वारा समीक्षा की जानी जरूरी है ताकि इस ड्रग को लाइसेंस दिया जा सके। इसके साथ ही अलग अलग देशों के स्वास्थ्य विभागों की ओर से भी आकलन जरूरी होगा।"

"जब ये सब हो रहा है, तब हमें इस ट्रायल और दूसरे ट्रायल्स से ज्यादा और दीर्घकालिक डेटा मिलेगा जिससे ये तय किया जा ,सकेगा कि ये दवा कोविड 19 भी रोकती है या नहीं। अगर एक दवा लोगों को आईसीयू में जाने से रोक सकती है तो हमें अस्पतालों पर हद से ज्यादा काम आने का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत कम हो सकती है।

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