Medically Reviewed by-
जीवनशैली और खान-पान में गड़बड़ी के कारण अब युवा भी कई ऐसी बीमारियों के शिकार होते जा रहे हैं, जिन्हें करीब एक दशक पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी माना जाता था। ऑस्टियोपोरोसिस, ऐसी ही एक गंभीर समस्या है, जिसका पिछले कुछ वर्षों में 25-40 की आयु वाले लोगों में भी निदान किया जा रहा है। ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डियों के कमजोर होने की समस्या है जिसमें हल्की सी चोट के कारण भी इनके टूटने का खतरा बना रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक प्रारंभिक चरणों में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं, यही कारण है कि इसे साइलेंट डिजीज माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऑस्टियोपोरोसिस के गंभीर रूप में छींकने या खांसने तक से हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा बना रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक चूंकि युवाओं में तेजी से इस समस्या का निदान किया जा रहा है ऐसे में इससे बचाव को लेकर लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर इस खतरे को बढ़ने से रोका जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही कुछ लक्षणों के बारे में जानते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस: छींकने-खांसने से भी हड्डियों में हो सकता है फ्रैक्चर, इन शुरुआती लक्षणों को न करें अनदेखा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हड्डियों में आसानी से फ्रैक्चर होना
हड्डियों का कमजोर होना ऑस्टियोपोरोसिस का प्रमुख लक्षण है, इसलिए यदि बार-बार आपकी हड्डियों में फ्रैक्चर हो जा रहा है तो सावधान हो जाएं। ऑस्टियोपोरोसिस के ऐसे खतरे को नजरअंदाज करने की भूल न करें। समय बढ़ने के साथ यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
बिना सहारे के फर्श से उठने में कठिनाई
डॉ जोहैब काजी बताते हैं, वैसे फर्श पर बैठने या नीचे बैठकर खाने की आदत लोगों में कम होती जा रही है, हालांकि, अगर आपको भोजन या योग के बाद बिना सहारे के उठने में कठिनाई का अनुभव होता है, तो यह रीढ़ या कूल्हे में हड्डियों के घनत्व में कमी का संकेत हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी गई है। अध्ययनों के अनुसार इस समस्या को ऑस्टियोपोरोसिस का प्रारंभिक संकेत माना जा सकता है।
चीजों को पकड़ने में कठिनाई
किसी भी चीज को पकड़ने या अच्छी ग्रिप बनाने में यदि आपको कठिनाई का अनुभव होता है तो सावधान हो जाएं। यह आपकी हड्डियों से संबंधित परेशानी का एक प्रारंभिक संकेत हो सकता है, जिसपर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि ग्रिप बनाने से संबंधित दिक्कत हड्डियों के कम होते घनत्व का संकेत हो सकती है, जिसके कारण बाद में ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
नाखूनों को टूटना
अक्सर नाखूनों के टूटने को लेकर हम ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, हालांकि नाखूनों और हड्डियों के बीच डाइसल्फ़ाइड बॉन्ड होता है। नाखूनों का बहुत आसानी से टूट जाना डाइसल्फ़ाइड बॉन्ड के कमजोर होने का संकेत हो सकता है। समय के साथ यह खतरा आपकी हड्डियों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए अगर आपके भी नाखून बार-बार टूट रहे हों तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
------
नोट: यह लेख डॉ जोहैब काज़ी (फिजियोथेरपिस्ट & कपिंग एकस्पर्ट) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।