आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं काफी आम हो गई हैं। अक्सर लोग इन दोनों स्थितियों को एक ही मान लेते हैं या उनके बीच के बारीक अंतर को नहीं समझ पाते। यह गलतफहमी गंभीर हो सकती है, क्योंकि सही इलाज के लिए इन दोनों के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है।
Health Tips: डिप्रेशन और एंग्जायटी में क्या अंतर है? बहुत कम लोगों को है मालूम
अक्सर लोग डिप्रेशन और एंग्जायटी को एक ही समझते हैं, ये बात सच है कि ये दोनों ही समस्याएं आपकी मानसिक स्थिति से जुड़ी है, लेकिन इन दोनों बहुत बड़ा अंतर है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या होती है एंग्जायटी?
एंग्जायटी का मुख्य लक्षण लगातार बनी रहने वाली बेचैनी और घबराहट है। इसमें व्यक्ति को दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में दिक्कत, पसीना आना और बेचैनी महसूस हो सकती है। यह अक्सर किसी खास स्थिति, जैसे परीक्षा या इंटरव्यू, के बारे में सोचने पर बढ़ जाती है। हालांकि, यह बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकती है।
ये भी पढ़ें- Insulin Resistance: Insulin Resistance: शरीर को धीरे-धीरे खोखला बना देती है इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति, आप भी न हो जाएं शिकार?
क्या होता है डिप्रेशन?
डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक स्थिति है, जिसके मुख्य लक्षणों में लगातार उदासी, निराशा और ऊर्जा की कमी शामिल है। डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को उन कामों में भी रुचि नहीं रहती जो उसे पहले पसंद थे। इसके अलावा, नींद की समस्या, भूख न लगना या बहुत ज्यादा लगना, और खुद को बेकार समझने की भावना भी इसके लक्षण हैं।
ये भी पढ़ें- Diabetes Tips: डायबिटीज से बचना है तो दिनचर्या में जरूर शामिल करें ये चार आदतें, कोसों दूर रहेगी बीमारी
दोनों के बीच का गहरा रिश्ता
यह जानना महत्वपूर्ण है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी अक्सर एक साथ हो सकते हैं। एक व्यक्ति जो डिप्रेशन से पीड़ित है, उसे एंग्जायटी भी हो सकती है, और इसका उल्टा भी सच है। कई बार एंग्जायटी की लंबी स्थिति डिप्रेशन में बदल सकती है, क्योंकि व्यक्ति लगातार चिंता और तनाव से थक जाता है।
दोनों ही स्थितियों के लिए सही उपचार बहुत जरूरी है। इनमें थेरेपी (जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी), दवाएं और जीवनशैली में बदलाव शामिल हो सकते हैं। अगर आपको या आपके किसी करीबी को ऐसे लक्षण महसूस हों, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेना बेहद जरूरी है। सही जानकारी और समय पर इलाज से इन समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।