डायबिटीज की समस्या को विशेषज्ञ गंभीर 'साइलेंट किलर' बीमारियों के रूप में वर्गीकृत करते हैं, क्योंकि इसके कारण शरीर के कई अंगों को समय के साथ क्षति पहुंचने का खतरा हो सकता है। डायबिटीज वाले रोगियों में किडनी, लिवर और आंखों की समस्या होना काफी सामान्य माना जाता है, इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए सभी लोगों को ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है।
Health Tips: माता-पिता में से किसी को भी है डायबिटीज, तो आप भी अभी से जीवनशैली में कर लें ये सुधार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बॉडी चेकअप कराते रहना जरूरी
मधुमेह को मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और मेटाबॉलिज्म से संबंधित बीमारी के रूप में जाना जाता है। ऐसे में यदि आपमें इसका आनुवांशिक खतरा है तो लाइफस्टाइल को ठीक रखना बहुत जरूरी हो जाता है। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए हर छह महीने पर पूरे शरीर की जांच कराते रहें, जिससे किसी भी तरह की पनपती समस्या को बढ़ने से पहले ही पहचाना जा सके। ऐसा करके आप डायबिटीज के जोखिमों से बचे रह सकते हैं। वार्षिक रूप से शारीरिक और आंखों की जांच के अलावा, वर्ष में दो से चार मधुमेह की जांच कराना सुनिश्चित करें।
आहार पर विशेष ध्यान रखें
डायबिटीज के संभावित जोखिम से बचे रहने के लिए सभी लोगों को आहार को संतुलित और पौष्टिक बनाए रखना जरूरी होता है। भोजन में हरी सब्जियों, करेला, मौसमी फलों को शामिल करें। चीनी का सेवन कम से कम करें, संभव हो तो न करें। इसके अलावा समय पर भोजन करना सुनिश्चित करना भी बहुत आवश्यक माना जाता है। दो मील के बीच में 3-4 घंटे से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
नियमित व्यायाम बहुत आवश्यक
यदि आप डायबिटीज के शिकार हैं या नहीं भी हैं, दोनों ही स्थितियों में नियमित रूप से व्यायाम की आदत बनाना बहुत आवश्यक है। योग-व्यायाम, शारीरिक निष्क्रियता को कम करते हैं जिससे डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि रोजाना व्यायाम करने वालों की तुलना में, व्यायाम न करने वालों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने का जोखिम अधिक होता है।
तनाव-नींद पर दें ध्यान
तनाव और नींद की कमी, दोनों ही स्थितियां आपमें मधुमेह विकसित होने का कारण बन सकती हैं। सभी लोगों को रात में 6-8 घंटे की निर्बाध नींद लेना बहुत आवश्यक होता है, यह तनाव को भी कंट्रोल करने में आपके लिए सहायक है। इसके अलावा यदि आपमें चिंता-तनाव की समस्या अधिक रहती है तो योग-मेडिटेशन को प्रयोग में लाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। तनाव-नींद पर ध्यान देकर डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।