आज देश आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है। साल 1947 से अब तक देश ने अनेक क्षेत्रों में विजय गाथा लिखी। दुनिया ने भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का लोहा माना। बात अगर स्वास्थ्य के क्षेत्र की उपलब्धियों की करें तो आजादी के बाद पोलियो जैसी गंभीर बीमारी को हमने मात दी, कोरोना महामारी के दौरान सबसे पहले वैक्सीन तैयार कर देश के लोगों को गंभीर संक्रमण से न सिर्फ सुरक्षित किया बल्कि विदेशों में भी वैक्सीन की सप्लाई की।
आजादी के 75 साल: मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैले स्टिग्मा को तोड़ने की जरूरत, मन स्वस्थ तभी शरीर रहेगा स्वस्थ
मन और शरीर एक दूसरे के पूरक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जब भी बात संपूर्ण स्वास्थ्य की होती है, तो इसे अक्सर शरीर की तमाम बीमारियों तक ही सीमित करके देखा जाता है, पर स्वस्थ मन के बिना स्वस्थ शरीर की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोरोना महामारी के बाद से लोगों में जिज्ञासा जरूर बढ़ी है, हालांकि अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक समस्याओं को लेकर लोग भ्रमित रहते हैं। चिंता-तनाव जैसी समस्याओं से शुरू होकर यह अवसाद जैसी गंभीर स्थितियों का रूप ले सकता है, इस बारे में लोगों को सजग और जागरूक करने की आवश्यकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मनोरोग विशेषज्ञ कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण लंबे समय से इस समस्या को अनदेखा किया गया है। लोग मानसिक स्वास्थ्य की बात नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से लोगों का उनको देखने के प्रति नजरिया बदल जाएगा, मानसिक स्वास्थ्य और बीमारियां उस व्यक्ति को खतरनाक या अलग बना देती हैं और उनमें कई अन्य नकारात्मक गुण आ जाते हैं।
इस तरह की सोच साफ दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर अब तक लोगों को हम इस गंभीर और तेजी से बढ़ती दिक्कत के बारे में समझा ही नहीं पाए हैं। यही कारण है कि ज्यादातर लोगों में अवसाद जैसे गंभीर मामलों को अनदेखा कर वैकल्पिक विधियों से इसे ठीक करने का प्रयास किया जाता रहा है।
कैसे दूर करें स्टिग्मा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में ध्यान दिया है, पर शुरुआत हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने के साथ करनी होगी। मानसिक स्वास्थ्य को अपनी बातचीत का हिस्सा बनाएं। लोगों से पूछें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं? दोस्तों, परिवार के साथ इसपर बात की जाए, अगर किसी को समस्या है तो उसे संबंधित मनोचिकित्सक तक ले जाने में बिल्कुल संकोच न करें।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार लोगों को आपके साथ की जरूरत होती है, उनसे अच्छा व्यवहार करें, यह बीमारी को ठीक करने में विशेष मददगार हो सकता है। उन्हें यह महसूस न कराएं कि किसी भी रूप में वे अलग हैं या उनके साथ अलग व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके प्रति असभ्य न हों। लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना बहुत आवश्यक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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