त्वचा में खुजली, खुस्की, लालिमा जैसी समस्याएं होना सामान्य है, ये किसी एलर्जी, प्रतिक्रिया या बीमारियों के कारण हो सकती है। पर हर बार इन समस्याओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। त्वचा की कुछ समस्याएं अंतर्निहित बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं जिसके बारे में गंभीरता से ध्यान दिया जाना आवश्यक हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, त्वचा में खुजली, ड्राई स्किन जैसी समस्याएं रक्त संचरण की समस्याओं के कारण हो सकती हैं और परिसंचरण में होने वाली समस्याएं गंभीर समस्याकारक भी हो सकती है, इसलिए इनपर ध्यान दिया जाना बहुत आवश्यक है।
Diabetes Issue: त्वचा में होने वाली समस्याओं को हर बार हल्के में न लें, ये मधुमेह का भी हो सकती है संकेत
त्वचा पर छालों की समस्या
मधुमेह वाले लोगों में त्वचा पर छाले होने की दिक्कत काफी आम है, इसमें हाथों की उंगलियों, पैर की उंगलियों, हाथों, पैरों में छाले होने लगते हैं। आमतौर पर ये छाले सफेद होते हैं। छाले डरावने लग सकते हैं, लेकिन वे आम तौर पर दर्द नहीं देते और लगभग दो-तीन सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाते हैं। ये छाले इस बात का संकेत हो सकते हैं कि आपको मधुमेह है या आपके ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं है। इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना आवश्यक माना जाता है।
डिजिटल स्केलेरोसिस
मधुमेह के शिकार लोगों में डिजिटल स्केलेरोसिस होने का खतरा भी काफी आम होता है, जिसमें आपकी त्वचा सामान्य से मोटी हो जाती है। टाइप-1 और टाइप-2 दोनों प्रकार के डायबिटीज के शिकार लोगों में ये समस्या हो सकती हैं। हाथों के पीछे या उंगलियों या पैर की उंगलियों पर त्वचा मोटी और मोम नुमा हो सकती है। अगर आपके ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं रहता है तो इस रोग के विकसित होने का जोखिम अधिक होती है।
नेक्रोबायोसिस लिपोइडिका
नेक्रोबायोसिस का मतलब है कोशिकाओं का डेड होना। आपकी त्वचा पर छोटे, उभरे हुए, लाल धब्बे धीरे-धीरे बड़े और चमकदार हो जाते हैं और कभी-कभी पीले हो जाते हैं। इसमें त्वचा पतली और फट भी सकती है, जिससे घाव हो सकते हैं जिसमें अल्सर होने का भी खतरा देखा जाता रहा है। वैसे तो इस तरह के मामले काफी दुर्लभ है, मधुमेह से पीड़ित 300 लोगों में से केवल एक को ही यह बीमारी होती है। मधुमेह रोगियों को त्वचा की समस्याओं पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।