दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर से बढ़ने लगा है। यूरोप में कोरोना की लहर को देखते हुए इटली, स्पेन, ब्रिटेन समेत कई देशों ने फिर से पाबंदियां लगा दी हैं, जबकि कई अन्य देश भी लॉकडाउन की ओर अग्रसर हैं। कोरोना की सुरक्षित और कारगर वैक्सीन आने में अभी देर है और तबतक इस महामारी पर नियंत्रण के अन्य एहतियात और उपाय अपनाए जाने की जरूरत है। कोरोना से प्रभावित कई देश इस महामारी से निपटने के लिए नई रणनीति भी अपनाते दिख रहे हैं। मसलन, जर्मनी ने रैपिड एंटीजन टेस्ट की नीति पर जोर दिया है, वहीं कुछ देशों में आपातकालीन अप्रूवल के तहत उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। अब एक देश ने 17 मिलियन यानी 1.70 करोड़ चूहों को मारने की तैयारी में है।
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चूहों को मारने की योजना (सांकेतिक तस्वीर)
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दरअसल, जानवरों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस संकमण में हुए बदलावों को लेकर डेनमार्क ऐसा कदम उठाने जा रहा है। इंसानों में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद डेनमार्क की सरकार ने एक करोड़ 70 लाख चूहों (Mink) को मारने की योजना बना रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रामक रोग और वैक्सीन विशेषज्ञ प्रो. केरे मोलक ने चेताया है कि मिंक(चूहों की प्रजाति) के जरिए कोरोना वायरस की एक और लहर आ सकती है। चूहों में वायरस के म्यूटेशन की संभावना को देखते हुए उन्होंने यह आशंका जताई है।
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चूहों को मारने की योजना (सांकेतिक तस्वीर)
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द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डच विषाणुविज्ञानी और पशुजन्य रोग विशेषज्ञ डेर पोएल ने कहा कि चूहों में वायरस के म्यूटेशन की संभावना है, जो वायरस के स्पाइक प्रोटीन में पाया जाता है। हालांकि हम वास्तव में यह नहीं जानते कि हमारे पास कितना कारगर टीका है, इसलिए इस दिशा में बहुत अधिक शोध की आवश्यकता है। डेनमार्क के अधिकारियों ने कहा कि नए म्यूटेटेड यानी उत्परिवर्तित वायरस के पांच मामले मिंक फार्म में और 12 मामले मनुष्यों में दर्ज किए गए थे। उनका कहना था कि देश में 15 से 17 मिलियन चूहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
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डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने मनुष्यों और चूहों में कोरोना वायरस के कुछ लक्षणों को पाया है, जो एंटीबॉडी के प्रति संवेदनशीलता में कमी दिखाता है। फ्रेडरिकसेन ने कहा कि देश की आबादी के प्रति हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन अब जो कोरोना वायरस में म्यूटेशन पाया गया है, उसके साथ हमारी बाकी दुनिया के लिए भी बड़ी जिम्मेदारी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर हुए शोध के बाद निष्कर्ष को विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के साथ साझा किया गया है। शोध के निष्कर्ष राज्य सीरम संस्थान, संक्रामक रोगों से निपटने वाले डेनिश अथॉरिटी द्वारा प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित थे। डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ माइक रेयान ने कहा कि इंसानों की पूर्ण पैमाने पर वैज्ञानिक जांच के लिए बुलाया गया है। चीन में कोरोना से संक्रमित चूहों से यह वायरस मनुष्यों में जाने की बात कही।