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Dengue Complication: दिल्ली में बढ़े केस, संक्रमितों में लिवर की गंभीर समस्या को लेकर डॉक्टरों ने किया अलर्ट

Sat, 29 Oct 2022 01:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 29 Oct 2022 01:54 PM IST
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dengue risk factors and complaints, many dengue patients are developing liver dysfunction
डेंगू संक्रमितों में देखे जा रहे हैं गंभीर लक्षण - फोटो : istock

राजधानी दिल्ली में हर साल अक्तूबर-नवंबर के महीनों में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती रही है। इस साल अक्तूबर के महीने में 900 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। इसके साथ, राष्ट्रीय राजधानी में डेंगू के मामलों की संख्या बढ़कर 1900 के करीब पहुंच गई है। 12 अक्टूबर तक डेंगू संक्रमण की संख्या 1,572 थी।



डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच संक्रमितों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। डॉक्टरों ने बताया कि डेंगू के शिकार कई वयस्कों (20-40 की आयु) में लिवर डिस्फंक्शन की दिक्कत देखी जा रही है। 10 में से छह रोगियों में लिवर से संबंधित इस विकार का खतरा हो सकता है, जिसको लेकर फिलहाल सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के कारण लिवर से संबंधित विकारों का तेजी से  बढ़ना चौंकाने वाला है। विशेषकर युवाओं में यह दिक्कत अधिक देखी जा रही है। डिस्फंक्शन की समस्या आगे चलकर क्रोनिक हेपेटाइटिस या पित्त नली प्रणाली में सूजन का कारण बन सकती है। डेंगू के कारण सामान्य लक्षणों के साथ पहले भी लोगों को पेट से संबंधित दिक्कतें होती रही हैं, पर लिवर से संबंधित विकारों का जोखिम ज्यादा गंभीर है। आइए जानते हैं कि डेंगू किस प्रकार से लिवर के लिए जोखिमों को बढ़ा रहा है और इस तरह के जोखिमों से बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?

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डेंगू में लिवर की समस्याओं का खतरा - फोटो : iStock

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉ श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, डेंगू के कारण लिवर की समस्याओं का जोखिम हो सकता है, इसका मुख्य कारण अनियंत्रित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया मानी जाती है। कुछ स्थितियों में शरीर अपनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में असमर्थ होता है, जो इस प्रकार की जटिलताओं का कारण बन सकती है। डेंगू के गंभीर संक्रमण के शिकार या अस्पताल में भर्ती मरीजों में लिवर से संबंधित दिक्कतों के विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है। 

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लिवर के गंबीर लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : Istock

कैसे करें इस गंभीर समस्या के लक्षणों की पहचान

डॉ श्रेय कहते हैं, डेंगू संक्रमण के दौरान होने वाली लिवर की समस्याओं में मरीजों को पेट में दर्द, उल्टी और भूख न लगने जैसी दिक्कत हो सकते हैं। आंखों के रंग या पेशाब में पीलापन, पेट दर्द और इससे संबंधित अन्य समस्याओं में भी लिवर पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी इस प्रकार के विकारों के विकसित होने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। 

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दिल्ली में डेंगू संक्रमण का कहर - फोटो : istock

डेंगू के गंभीर लक्षणों के बारे में भी जानिए

डॉक्टर्स कहते हैं, वैसे तो डेंगू के ज्यादातर मामले सामान्य उपचार के माध्यमों से ठीक किए जा सकते हैं, पर कुछ स्थितियों में इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के विकसित होने का भी खतरा रहता है। गंभीर डेंगू बुखार आंतरिक रक्तस्राव और अंगों की क्षति का कारण भी बन सकता है। कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर तेजी से कम होने की समस्या भी देखी गई है। गंभीर डेंगू बुखार मौत का कारण बन सकता है।

जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डेंगू बुखार होता है, उनसे इसके बच्चे में भी फैलाने का खतरा हो सकता है। डेंगू से बचाव के उपाय करते रहना सभी के लिए आवश्यक है।

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मच्छरों से बचाव के करें उपाय - फोटो : istock

डेंगू से कैसे बचाव करें?

डॉक्टर श्रेय कहते हैं, डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए मच्छरों के काटने से बचाव करना सबसे आवश्यक माना जाता है। पूरी बाजू वाले कपड़े पहनकर रखें। डेंगू के मच्छर अधिकतर दिन के समय में काटते हैं, ऐसे में इससे बचाव के उपाय करना बहुत आवश्यक माना जाता है। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना ज्यादा सुरक्षित होता है। क्वाइल्स के प्रयोग से स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने को जोखिम रहता है, इसलिए मच्छरदानी का प्रयोग करें। डेंगू के लक्षणों की समय रहते पहचान कर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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