पिछले कई वर्षों की तरह इस साल भी अगस्त-सितंबर के महीने में राजधानी दिल्ली में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ रही है, हालांकि ज्यादातर लोग आसानी से ठीक होकर घर लौट रहे हैं। गंभीर रोग का खतरा सिर्फ उन्हीं में देखा जा रहा है जो या तो कोमोरबिडिटी के शिकार हैं या फिर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है।
Dengue In Delhi: डेंगू ने छह साल का तोड़ा रिकॉर्ड, इस बार गंभीर रोग का खतरा भी अधिक, बरतें सावधानी
डेंगू के संक्रामक स्ट्रेन का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली में डेंगू का अत्यधिक संक्रामक और घातक DEN-2 स्ट्रेन देखा जा रहा है। डेन-2 स्ट्रेन से जुड़े लक्षण काफी हद तक डेंगू के अन्य सभी प्रकारों से मिलते-जुलते हैं, हालांकि इसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा और रक्तस्रावी बुखार का जोखिम अधिक देखा जा रहा है।
यदि समय पर इसका निदान और इलाज न किया जाए तो मरीजों को शॉक लगने और रक्तस्राव के कारण होने वाली जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों डेंगू से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।
DEN-2 स्ट्रेन बढ़ा सकता है जोखिम
डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के मामले आमतौर पर सामान्य उपचार के जरिए आसानी से ठीक किए जा सकते हैं। हालांकि DEN-2 स्ट्रेन की प्रकृति के कारण वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद यह तेजी से ब्लड प्लेटलेट काउंट को कम करने लगती है, जिसके कारण स्वास्थ्य जटिलताओं के बढ़ने का जोखिम रहता है। इसके कारण शॉक लगने और रक्तस्राव को जोखिम भी बढ़ जाता है जिसे डेंगू के गंभीर लक्षणों में से एक माना जाता है।
गौरतलब है कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है। यह वायरस मादा एडीसेजिप्टी मच्छरों के काटने से फैलता है, ये मच्छर दिन के समय में अधिक सक्रिय रहते हैं। डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) हैं। टाइप 2, जिसे DENV-2 के नाम से भी जाना जाता है, जो वर्तमान में दिल्ली तेजी से बढ़ रहा है, इसे सबसे गंभीर प्रकार वाला माना जाता है।
डेंगू से बचाव के लिए करें प्रयास
डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के जोखिमों को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप मच्छरों को काटने से बचाव के लिए प्रयास करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, घर के आसपास साफ-सफाई रखें और पानी एकत्रित न होने दें। साफ-स्थिर पानी में मच्छर पनपते हैं, इसलिए पानी को बदलते रहें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। इसके अलावा अगर 2-3 दिनों तक बुखार की समस्या है तो डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच कराएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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