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चिंता: दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है डेल्टा वैरिएंट, शीर्ष वैज्ञानिकों से जानिए बचाव के उपाय

Fri, 02 Jul 2021 06:46 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 02 Jul 2021 06:46 PM IST
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Delta variant is spreading rapidly across the world, what expert says on it
दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना का डेल्टा वैरिएंट - फोटो : पिक्साबे

दुनियाभर में कोरोना के तेजी से बढ़ते डेल्टा वैरिएंट को लेकर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। कई देशों में संक्रमण इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि वहां पर फिर से लॉकडाउन लगाने जैसी स्थितियां बनने लगी हैं। इससे लोगों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है, स्वास्थ्य संगठन लगातार इस बारे में विचार मंथन कर रहे हैं। इस बीच यूरोपियन मेडिकल एजेंसी (ईएमए) ने स्पष्ट किया है कि वैक्सीन की दो डोज देने की नीति डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षा देने में काफी कारगर साबित हो सकती है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेल्टा वैरिएंट के तेजी से बढ़ते मामलों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इसे यूरोपीय देशों के लिए अगली लहर का कारक बनने की आशंका जताई थी।


ईएमए के वैक्सीन रणनीतिक  मार्को कैवेलरी का कहना है कि फिलहाल यूरोपीय संघ में स्वीकृत चारों टीके डेल्टा वैरिएंट सहित यूरोप में फैले सभी वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी साबित हुए हैं। वैक्सीन को दो डोज देने की रणनीति को कोरोना के घातक वैरिएंट्स से सुरक्षा देने में काफी असरदार पाया गया है। आइए इस लेख में दुनियाभर में डेल्टा वैरिएंट से उत्पन्न हुए कहर और इससे बचाव के लिए प्रयोग में लाए जा रहे उपायों के बारे में जानते हैं। 

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वैक्सीनेशन से ही मिलेगी कोरोना से सुरक्षा - फोटो : PTI

वैक्सीनेशन की दो डोज कोरोना से सुरक्षा के लिए जरूरी
वैक्सीनेशन की दो डोज को विशेषज्ञ कोरोना से सुरक्षा की दृष्टि से काफी असरदार मानते हैं। कार्डिफ मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में इम्यूनोलॉजी के वरिष्ठ व्याख्याता रेबेका आइशेलर बताते हैं कि फाइजर या एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दो खुराक लेने के बाद डेल्टा वैरिएंट्स से संक्रमित लोगों में गंभीर रूप से बीमार होने या अस्पताल में भर्ती होने की आशंका काफी कम देखी गई है। हालांकि जिन लोगों को वैक्सीन की अबतक केवल एक ही डोज मिली, उनमें खतरा हो सकता है।

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कोरोना टीकों के बीच अंतराल का फैसला - फोटो : पिक्साबे

वैक्सीन के दो डोज में अंतराल रखने का फैसला सही
वैक्सीन के दो डोज में अंतराल के फैसले को कई वैज्ञानिक फायदेमंद मानते हैं। ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय में मेडिसिन के प्रोफेसर पॉल हंटर का तर्क है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक में देरी करने का फैसला कई मायनों में बेहतर माना जा सकता है। वैक्सीन की दूसरी डोज में नियत अंतराल रखने से शरीर में बनी एंटीबॉडीज काफी प्रभावी हो सकती हैं। इन एंटीबॉडीज को कोरोना के कई खतरनाक वैरिएंट्स से मुकाबले में काफी शक्तिशाली पाया गया है। 

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कई देशों से सामने आ रहे हैं टीकों में अनियमितता के मामले - फोटो : PTI

अनियमित वैक्सीनेशन की समस्याओं की तरफ देना होगा ध्यान
कई देशों के लिए वैक्सीन कार्यक्रम, महामारी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता नजर आ रहा है वहीं दक्षिण अफ्रीका में बहुत ही अलग कहानी है। दक्षिण अफ्रीका में अब तक 5 फीसदी से कम लोगों को ही टीका लगाया गया है, वहीं देश में एक बार फिर कोविड-19 का प्रकोप बढ़ने लगा है। विटवाटरसैंड विश्वविद्यालय में वैक्सीनोलॉजी के प्रोफेसर शब्बीर ए माधी कहते हैं कि यह देश की टीकाकरण विफलताओं की ओर ध्यान केंद्रित करता है। दक्षिण अफ्रीका ने वैक्सीन की खुराक खरीदने की कोशिश बहुत देर से शुरू की और बाद में टीकाकरण के लिए लोग भी ज्यादा सामने नहीं आ रहे हैं, जोकि चिंता का कारण बना हुआ है। 


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नोट: यह लेख तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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