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सावधान: ऐसे लोगों में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण का खतरा अधिक, अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम भी दोगुना

Sat, 24 Jul 2021 05:14 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर अजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर अजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 24 Jul 2021 05:14 PM IST
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delta variant hospitalization rate, study claims people with comorbidity at high risk
कोरोना का डेल्टा वैरिएंट चिंता का विषय - फोटो : pixabay

दुनियाभर में तेजी से फैल रहा कोरोना का डेल्टा वैरिएंट, स्वास्थ्य संगठनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया के 96 से ज्यादा देशों में डेल्टा वैरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम में इस वैरिएंट के कारण कोरोना के मामले फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं, इसके चलते कई देश दोबारा लॉकडाउन की तरफ बढ़ रहे हैं। डेल्टा वैरिएंट, जो म्यूटेशन के साथ डेल्टा प्लस में बदल गया है, उसे कोरोना के मूल अल्फा वैरिएंट की तुलना में 60 फीसदी अधिक संक्रामक माना जा रहा है। डेल्टा वैरिएंट को लेकर हो रहे तमाम शोध में वैज्ञानिक इसे कोरोना के अन्य वैरिएंट्स से कहीं ज्यादा खतरनाक और संक्रामक मान रहे हैं।


हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इस वैरिएंट से संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम दोगुना से अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं डब्ल्यूएचओ ने अपने हालिया बयान में कहा है कि इस समय पूरी दुनिया 'बेहद खतरनाक दौर' से गुजर रही है, लोगों को इससे बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि वैज्ञानिक किन लोगों में डेल्टा वैरिएंट का खतरा अधिक देख रहे हैं?

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कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

डबलिंग रेट भी चिंता का विषय
पिछले महीने स्कॉटिश शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्ययन से पता चला है कि डेल्टा संस्करण के कारण ब्रिटेन में संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम दोगुना से अधिक हो गया है। इतना ही नहीं अन्य वैरिएंट्स की तुलना में डेल्टा वैरिएंट का डबलिंग रेट भी काफी अधिक पाया गया है। डबलिंग रेट, संक्रमण की संख्या को दोगुना होने में लगने वाले समय को कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट के कारण होने वाले संक्रमण का डबलिंग रेट 4.5 दिनों से लेकर 11.5 दिनों तक हो सकता है।

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तेजी से बढ़ रहे हैं डेल्टा वैरिएंट के मामले - फोटो : Social media

ऐसे लोगों में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा अधिक
'द लांसेट' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि कोमोरबिडिटी वाले और वृद्ध लोगों में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा अधिक हो सकता है। वहीं पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) की ओर से जारी सूचना में युवाओं के साथ उन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक बताया गया है जिनका अब तक टीकाकरण नहीं हो पाया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन की दो डोज डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं। सभी लोगों को इस खतरे से सुरक्षित रहने के लिए जल्द से जल्द टीकाकरण जरूर करा लेना चाहिए।

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वैक्सीनेशन ही बचाव का सबसे आसान तरीका - फोटो : PTI

कौन सी वैक्सीन ज्यादा असरदार
इस बीच, पीएचई ने कहा कि फाइजर और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार की गई कोविड वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 90 फीसदी तक कम कर सकती है। एस्ट्राजेनेका वैक्सीन, भारत में कोविशील्ड नाम उपलब्ध है। वहीं भारत के लिहाजे से बात करें तो पुणे के इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ICMR-NIV) के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि भारत बायोटेक का कोवैक्सीन, डेल्टा और बीटा वैरिएंट को बेअसर करने में कारगर हो सकता है।

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कई वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ साबित हुई हैं असरदार - फोटो : iStock

दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों का क्या कहना है?
एक अन्य अध्ययन में दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में इस्तेमाल होने वाली अमेरिकी फार्मा प्रमुख फाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट्स के खिलाफ अधिक प्रभावी पाई गई है। दक्षिण अफ्रीकी चिकित्सा अनुसंधान के अध्यक्ष और सीईओ प्रोफेसर ग्लेंडा ग्रे ने एक बयान में कहा, कई अध्ययनों के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया है कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ बेहतर काम कर रही है, फाइजर वैक्सीन के भी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। 

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स्रोत और संदर्भ: 
Risk of hospitalisation associated with infection with SARS-CoV-2 lineage B.1.1.7 in Denmark: an observational cohort study

अस्वीकरण नोट: यह लेख द लांसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।

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