राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों वायु प्रदूषण की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले करीब दो महीने से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 'खराब' से 'बेहद खराब' स्तर का बना हुआ है। हवा में बढ़ते प्रदूषक और जहरीली गैसें सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाती जा रही हैं।
Health Risk: जहरीली होती जा रही है दिल्ली-एनसीआर की हवा, ओजोन के बाद अब इस केमिकल का बढ़ा स्तर
- एक नए विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली के सालाना पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सेकेंडरी अमोनियम सल्फेट से बना होता है, जो कोयला प्लांट्स, इंडस्ट्रीज और खेती से बनता है।
अमोनियम सल्फेट का बढ़ता स्तर खतरनाक
फिनलैंड के थिंक-टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा किए गए एक नए विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली के सालाना पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सेकेंडरी अमोनियम सल्फेट से बना होता है, जो कोयला प्लांट्स, इंडस्ट्रीज और खेती से निकलता है।
अमोनियम सल्फेट एक सेकेंडरी इनऑर्गेनिक एरोसोल है जो सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) के ऑक्सीडेशन से सल्फेट में बदलने से बनता है। यह खास तौर पर चिंताजनक है, क्योंकि 11.2 मिलियन टन के साथ भारत दुनिया में SO2 का सबसे बड़ा उत्सर्जक है।
अमोनियम वाला पीएम 2.5 कहीं ज्यादा खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीएम 2.5 पहले से ही फेफड़ों और खून में जाकर स्वास्थ्य के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला माना जाता रहा है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि अमोनियम वाला पीएम 2.5 असल में सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है, यह दूसरे टाइप के मुकाबले मौत के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।
दिल्ली में पहले से ही वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा, फेफड़ों की क्षमता में कमी और दिल की बीमारियों का जोखिम देखा जा रहा है, अमोनियम सल्फेट का बढ़ा स्तर और भी चुनौतियों वाला हो सकता है।
अध्ययनों से पता चलता है कि अमोनियम सल्फेट के संपर्क में आने पर आंखों, त्वचा और सांस की नली में जलन की समस्या हो सकती है। खाद्य पदार्थों में इसकी मात्रा मतली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द सहित पाचन की गंभीर दिक्कतों का कारण बन सकती है। इसका तंत्रिकाओं पर भी दुष्प्रभाव देखा गया है, जिसके कारण भ्रम, कंपकंपी और न्यूरलॉजिकल समस्याएं होने का खतरा रहता है। अस्थमा और सांस के अन्य मरीजों में ये बीमारी को ट्रिगर करने वाली हो सकती है।
वायु प्रदूषण कोरोना के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट
देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर एक अन्य रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद वायु प्रदूषण शायद भारत के सामने आया सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।
देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियों की एक बड़ी लहर आने वाली है, इसका अभी तक ठीक से पता नहीं चल पाया है और न ही इसका इलाज हो रहा है। ये स्वास्थ्य सेवाओं पर आने वाले वर्षों में अतिरिक्त दबाव भी बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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स्रोत:
Secondary particulate matter is a core driver of dangerous PM2.5 in India
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