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Health Risk: जहरीली होती जा रही है दिल्ली-एनसीआर की हवा, ओजोन के बाद अब इस केमिकल का बढ़ा स्तर

Fri, 26 Dec 2025 08:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 26 Dec 2025 08:09 PM IST
सार

  • एक नए विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली के सालाना पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सेकेंडरी अमोनियम सल्फेट से बना होता है, जो कोयला प्लांट्स, इंडस्ट्रीज और खेती से बनता है।

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Delhi pollution alert one-third of annual PM2.5 pollution consists of secondary ammonium sulfate
दिल्ली की हवा में बढ़ते खतरीले गैसे - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों वायु प्रदूषण की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले करीब दो महीने से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 'खराब' से 'बेहद खराब' स्तर का बना हुआ है। हवा में बढ़ते प्रदूषक और जहरीली गैसें सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाती जा रही हैं।



9 अक्तूबर 2025 को अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि दिल्ली की हवा में ओजोन गैस की मात्रा बढ़ गई है, जिसे हृदय से लेकर मस्तिष्क तक सभी के लिए खतरनाक पाया गया था। शोधकर्ताओं ने बताया था कि ओजोन गैस का बढ़ता स्तर सांस की बीमारियों, विशेष रूप से अस्थमा-ब्रोंकाइटिस को बढ़ावा देती है, साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाकर खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती है।

इसी क्रम में अब एक अन्य रिपोर्ट में वैज्ञानिकों की टीम ने दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम2.5) और इसमें मौजूद हानिकारक रसायनों के बढ़ते स्तर को लेकर चिंता जताई है। वैज्ञानिकों ने कहा, दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सेकेंडरी अमोनियम सल्फेट से आता है। इसके कारण स्वास्थ्य के लिए मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं।

Delhi pollution alert one-third of annual PM2.5 pollution consists of secondary ammonium sulfate
दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषण का स्तर - फोटो : ANI

अमोनियम सल्फेट का बढ़ता स्तर खतरनाक

फिनलैंड के थिंक-टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा किए गए एक नए विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली के सालाना पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सेकेंडरी अमोनियम सल्फेट से बना होता है, जो कोयला प्लांट्स, इंडस्ट्रीज और खेती से निकलता है।

अमोनियम सल्फेट एक सेकेंडरी इनऑर्गेनिक एरोसोल है जो सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) के ऑक्सीडेशन से सल्फेट में बदलने से बनता है। यह खास तौर पर चिंताजनक है, क्योंकि 11.2 मिलियन टन के साथ भारत दुनिया में SO2 का सबसे बड़ा उत्सर्जक है।

Delhi pollution alert one-third of annual PM2.5 pollution consists of secondary ammonium sulfate
वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com

अमोनियम वाला पीएम 2.5 कहीं ज्यादा खतरनाक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीएम 2.5 पहले से ही फेफड़ों और खून में जाकर स्वास्थ्य के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला माना जाता रहा है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि अमोनियम वाला पीएम 2.5 असल में सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है, यह दूसरे टाइप के मुकाबले मौत के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।

दिल्ली में पहले से ही वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा, फेफड़ों की क्षमता में कमी और दिल की बीमारियों का जोखिम देखा जा रहा है, अमोनियम सल्फेट का बढ़ा स्तर और भी चुनौतियों वाला हो सकता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि अमोनियम सल्फेट के संपर्क में आने पर आंखों, त्वचा और सांस की नली में जलन की समस्या हो सकती है। खाद्य पदार्थों में इसकी मात्रा मतली, उल्टी, दस्त और पेट दर्द सहित पाचन की गंभीर दिक्कतों का कारण बन सकती है। इसका तंत्रिकाओं पर भी दुष्प्रभाव देखा गया है, जिसके कारण भ्रम, कंपकंपी और न्यूरलॉजिकल समस्याएं होने का खतरा रहता है। अस्थमा और सांस के अन्य मरीजों में ये बीमारी को ट्रिगर करने वाली हो सकती है।

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Delhi pollution alert one-third of annual PM2.5 pollution consists of secondary ammonium sulfate
भारत में बढ़ती गंभीर बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com

वायु प्रदूषण कोरोना के बाद सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर एक अन्य रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद वायु प्रदूषण शायद भारत के सामने आया सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।

देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियों की एक बड़ी लहर आने वाली है, इसका अभी तक ठीक से पता नहीं चल पाया है और न ही इसका इलाज हो रहा है। ये स्वास्थ्य सेवाओं पर आने वाले वर्षों में अतिरिक्त दबाव भी बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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स्रोत:
Secondary particulate matter is a core driver of dangerous PM2.5 in India


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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