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Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर की हवा में 'घुला जहर', डॉक्टर बोले- सांस के अलावा इससे ब्रेन डैमेज का भी खतरा

Mon, 16 Jan 2023 04:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 16 Jan 2023 04:06 PM IST
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Delhi air quality remains in 'severe' category, Air pollution causes respiratory and neurological diseases
वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock

राजधानी दिल्ली-एनसीआर में जारी वायु प्रदूषण के कारण कई प्रकार की दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ गया है। अक्तूबर से हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) 'बेहद खराब' श्रेणी में बनी हुई है, इस तरह के वातावरण में सांस लेना गंभीर रोगकारक हो सकता है। प्रदूषण पर कंट्रोल करने के लिए सरकार ने दिल्ली में गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों पर पिछले दिनों प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद थोड़ा सुधार जरूर आया है पर एक्यूआई अब भी गंभीर श्रेणी में ही है। 14 जनवरी को एक्यूआई 353 (बहुत खराब) था जिसमें 15 जनवरी को 213 (खराब) मामूली सुधार हुआ है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस प्रकार के वातावरण में सांस लेना लोगों में कई प्रकार की दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। पिछले कुछ दिनों में अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। खराब हवा की गुणवत्ता न सिर्फ सांस के गंभीर रोगों का कारण बनती है साथ ही इससे अध्ययनों में और भी कई प्रकार के स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे के बारे में पता चलता है।

Delhi air quality remains in 'severe' category, Air pollution causes respiratory and neurological diseases
वायु प्रदूषण ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : istock

आईसीयू में बढ़ रहे हैं सांस के रोगी

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि ठंड के मौसम और प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अस्पतालों में सांस के रोगियों की संख्या भी बढ़ती हुई देखी जा रही है। इसमें से कई रोगियों की स्थिति काफी गंभीर भी है, जिसमें उन्हें तत्काल चिकित्सा या आईसीयू की जरूरत हो रही है। लंबे समय तक प्रदूषित वायु के संपर्क में रहने से वायुमार्ग और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है।

Delhi air quality remains in 'severe' category, Air pollution causes respiratory and neurological diseases
प्रदूषण का फेफड़ों पर असर - फोटो : iStock

क्या कहते हैं ईएनटी विशेषज्ञ?

सीके बिरला हॉस्पिटल में ईएनटी विभाग के डॉ. विजय वर्मा कहते हैं, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में जारी वृद्धि के कारण साइनोसाइटिस, एलर्जी, खांसी, संक्रमण और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों में लगभग 30% तक की उछाल आई है। नाक बहने-बंद नाक, गले में खराश, खांसी, सूंघने की क्षमता में कमी, थकान, सिरदर्द जैसी समस्याओं के साथ लोग अस्पतालों में आ रहे हैं। इस तरह के वातावरण के कारण कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ गया है। हानिकारक वायु कणों के कारण फेफड़ों की क्षमता में कमी देखी जा रही है, जोकि चिंताजनक है।

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प्रदूषण का मस्तिष्क पर भी हो सकता है असर - फोटो : iStock

वायु प्रदूषण के कारण न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा

वायु प्रदूषण के कारण सिर्फ सांस ही नहीं, कई और भी गंभीर बीमारियों के विकसित होने का खतरा हो सकता है। मैक्सिको में न्यूरोपैथोलॉजिस्ट लिलियन काल्डेरोन ने इसके दुष्प्रभावों को जानने के लिए कुत्तों के मस्तिष्क का अध्ययन किया। 40 कुत्तों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले कुत्तों में न्यूरोडीजेनेरेशन की शुरुआत आठ महीने की उम्र में शुरू हो गई। जबकि इनकी तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कुत्तों का दिमाग स्वस्थ पाया गया।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि प्रदूषण के कारण न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, इसपर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। गंभीर स्थितियों में इससे ब्रेन डैमेज का भी खतरा हो सकता है।

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प्रदूषण से करें बचाव - फोटो : Pixabay

प्रदूषण के माहौल से बचाव बहुत जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल्ली-एनसीआर के अलावा कई अन्य महानगरों की हालात भी कुछ इसी तरह की है। प्रदूषण से बचाव करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। हवा को साफ रखन के प्रयास किए जाने चाहिए। इनडोर पौधे लगाएं जिससे इसमें लाभ मिल सके। अपनी नाक और गले की सुरक्षा के लिए N95 मास्क का प्रयोग करें, खूब पानी पिएं और सांस के अभ्यास करें।

जिन लोगों को पहले से ही सांस की दिक्कत है, वह डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाइयां समय पर लेते रहें। इसके अलावा इनडोर प्रदूषण को कम करने के लिए कमरे में वेंटिलेशन का ध्यान रखें।


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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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