वायु प्रदूषण संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले करीब दो महीने से जिस तरह से हवा की गुणवत्ता खराब और बेहद खराब स्तर की बनी हुई है, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। अध्ययनों से पता चलता है कि प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने के कारण सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकाता है।
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शोधकर्ताओं ने बताया कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव देखे गए हैं। जो लोग वायु प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं उनमें समय के साथ चिंता, अवसाद और मानसिक विकार जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
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वायु प्रदूषण का मानसिक स्वास्थ्य पर असर
अध्ययनों में पाया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्या और मस्तिष्क संबंधित बीमारी, दोनों का खतरा रहता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग वायु प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं उनमें समय के साथ चिंता, अवसाद और मानसिक विकार होने का जोखिम बढ़ सकता है। कुछ अध्ययनों में इसे डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसे मस्तिष्क रोगों के जोखिम को भी बढ़ाने वाला पाया गया है।
प्रदूषित हवा को बच्चों और किशोरों के मेंटल हेल्थ के लिए भी हानिकारक माना जाता है। वायु की खराब गुणवत्ता के संपर्क में रहने वाले बच्चों और किशोरों में भविष्य में बाइपोलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया, व्यक्तित्व संबंधित विकार और आत्महत्या के विचार विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
प्रदूषण के कारण होने वाली दिक्कतें
अब सवाल ये है कि वायु प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य को किस प्रकार से नुकसान पहुंचाता है?
इसे समझने के लिए किए गए अध्ययन में पाया गया कि प्रदूषित हवा में नाइट्रिक ऑक्साइड और अन्य गैसों-रसायनों की अधिकता होती है। नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर में हर 10 μg/m3 की वृद्धि, उस स्थान पर रहने वाले लोगों में डिप्रेशन होने के खतरे को दोगुना तक बढ़ा देती है। इसके अलावा प्रदूषित हवा में मौजूद अन्य हानिकारक रसायनों को मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करके स्ट्रेस और आत्महत्या के जोखिमों को बढ़ाने वाला पाया गया है।
मस्तिष्क की समस्याएं
शोध बताते हैं कि वायु प्रदूषण मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है, जिसके कारण न्यूरॉन्स और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है। मस्तिष्क में सूजन की स्थिति को डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों के लिए प्रमुख कारण माना जाता रहा है।
प्रदूषण के कारण होने वाले जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इससे बचाव करते रहने की सलाह देते हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
गुरुग्राम स्थित एक अस्पताल में श्वसन चिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अरुणेश कुमार ने कहा प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचने के लिए सभी लोगों को विशेष रूप से सुबह और देर शाम के समय बाहरी गतिविधियों से बचाव करना चाहिए। इस दौरान वायु गुणवत्ता आमतौर पर सबसे खराब होती है। यदि बाहर जाना आवश्यक है, तो N95 या अच्छी क्वालिटी के मास्क पहनें। इससे हानिकारक कणों को फिल्टर करने में मदद मिल सकती है।
बाहरी प्रदूषण के अलावा घर के अंदर का प्रदूषण भी खतरनाक है, इससे बचाव के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। एलोवेरा और स्नेक प्लांट जैसे इनडोर प्लांट प्राकृतिक रूप से वायु गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Poor air quality found to affect mental health in many ways
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