भारतीय व्यंजनों को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ से परिपूर्ण माना जाता रहा है। दलिया, ऐसा ही एक आहार है, जिसे डॉक्टर पेट के लिए बहुत हल्का लेकिन सेहत के लिए पौष्टिक मानते हैं। अक्सर रोगियों को नाश्ते के रूप में दलिया खाने की सलाह दी जाती है, हालांकि इसका सेवन बिना किसी बीमारी वाले लोगों को भी नियमित रूप से करना चाहिए। टूटे हुए गेहूं से बना दलिया पचने में आसान और पोषण से भरपूर होता है। चूंकि दलिया में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो पेट को ठीक रखने के साथ, वजन घटाने और हल्के खाद्य पदार्थों का सबसे बेहतर विकल्प हो सकती है।
आज का हेल्थ टिप्स: बेहद पौष्टिक आहार है दलिया, जानिए क्या हैं इसे खाने के फायदे?
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पौष्टिकता और ऊर्जा से भरपूर
रोजाना सुबह नाश्ते में एक कटोरी दलिया को शामिल करके शरीर के लिए आवश्यक कई पोषक तत्व आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। दलिया,मैग्नीशियम और फाइबर का अच्छा स्रोत होता है। इतना ही नहीं नाश्ते में दलिया को शामिल करके शरीर के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। नियमित व्यायाम सत्र के बाद इसे खाकर खोई हुई ऊर्जा को फिर से प्राप्त कर सकते हैं।
रोजाना एक कटोरी दलिया खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है। दलिया फाइबर से भरपूर होता है,जो आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। इसमें कैलोरी भी कम होती है, यही कारण है कि जिन लोगों को वजन बढ़ने से संबंधित समस्या हो उनके लिए दलिया अच्छा विकल्प हो सकता है।
मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद
मधुमेह रोगियों के लिए दलिया खाना अच्छा विकल्प हो सकता है। असल में इसकी ग्लाइसेमिक इंडेक्स और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है जो इसे डायबिटीज रोगियों के लिए इसे फायदेमंद बनाती है। अध्ययनों से पता चलता है कि नमकीन दलिया का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखता है साथ ही पाचन क्रिया को भी ठीक बनाए रखने में भी सहायक होता है।
अगर आपको अक्सर कब्ज बने रहने की समस्या होती है तो दलिया खाना आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। दलिया में फाइबर की उचित मात्रा पाई जाती है जो पाचन को ठीक रखने में मदद करने के साथ कब्ज को रोकती है। इतना ही नहीं, यह मल की स्थिरता में भी सुधार करती है, जो कब्ज को दूर करने में मदद करता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।